घने कोहरे के बीच लाइट जलाकर चलते वाहन चालक और राहगीर
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पूरे उत्तर भारत में इस समय ठंड और शीत लहर का प्रकोप चल रहा है। दिल्ली का तापमान चार डिग्री से भी कम हो गया है। ठंड के मामले में यह तापमान शिमला जैसे बर्फीले और पहाड़ी इलाकों से भी कम है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह ठंड दिल की बिमारी झेल रहे लोगों के लिए बेहद खतरनाक साबित हो सकती है। ठंड और प्रदूषण का जहरीला कॉकटेल जानलेवा साबित हो सकता है, इसलिए दिल के मरीजों को इस मौसम में बहुत संभलकर रहना चाहिए।
एम्स के डॉक्टर ने ये बताया
दिल्ली के एम्स अस्पताल के कार्डियोलोजी विभाग के प्रोफेसर संदीप मिश्रा ने अमर उजाला को बताया कि हमारा शरीर ठंड के समय गर्मी बचाए रखने के लिए प्राकृतिक रूप से आंशिक संकुचन करता है। यह प्रक्रिया रक्त धमनियों में भी होती है, लेकिन यही प्रक्रिया दिल के मरीजों के लिए परेशानी का सबब बन जाती है। दरअसल, दिल के विभिन्न हिस्सों में रक्त की सप्लाई के लिए कोरोनरी आर्टरी काम करती है। इसके मार्ग में बाधा उत्पन्न होने से हमें हार्ट अटैक आ सकता है।
शुरू में ही यह कोरोनरी आर्टरी एलएडी, एलसीएक्स और आरसीए तीन भागों में बंट जाती है। इसमें एलएडी दिल के लगभग आधे भाग में रक्त पहुंचाता है। अगर इस हिस्से में किसी कारण रक्त प्रवाह आंशिक या पूर्ण रूप से बाधित हो जाए या इनमें क्लोट बन जाए तो आधे दिल में रक्त का प्रवाह प्रभावित हो सकता है। इस कारण रक्त न पहुंचने वाली जगहों की कोशिकाएं मरने लगती हैं। इसी प्रकार एलसीएक्स लगभग 30 फीसदी और आरसीए बाकी के 20 फीसदी हिस्से में रक्त पहुंचाता है। इनमें बाधा पहुंचने से इतने हिस्से की सेल के मृत होने का खतरा रहता है।
समस्या होने पर तुरंत पहुंचे अस्पताल
लेकिन इस प्रकार के हार्ट अटैक में अच्छी बात यह होती है कि इसमें किसी व्यक्ति की मृत्यु तुरंत नहीं होती। इसमें दर्द उत्पन्न होता है। दर्द उठने के बाद जितनी जल्दी हो सके, तब से लेकर अगले बारह घंटे तक का भी समय (अलग-अलग केस में अलग-अलग समय) होता है। अगर इस दौरान मरीज को चिकित्सकीय सहायता मिल जाती है तो उसकी जान बचाई जा सकती है।
डॉक्टर संदीप मिश्रा के मुताबिक अटैक की दूसरी स्थिति हार्ट फेलियर की होती है जिसमें सांस फूलने लगती है, दिमाग में रक्त की पहुंच कम होने से बेहोशी होने लगती है और पैरों में असामान्य सूजन होने लगती है। इस प्रकार की दिल की परेशानी में रक्त फेफड़ों की तरफ वापस जाने लगता है और ह्रदय के पास शारीर के अन्य हिस्सों को देने के लिए रक्त नहीं मिलता। लिहाजा हृदय के साथ पूरा शरीर शांत पड़ने लगता है।
हार्ट अटैक के मामले में सबसे खतरनाक कार्डिक अरेस्ट होता है जिसमें व्यक्ति की तत्काल मौत हो सकती है। क्योंकि इस स्थिति में रक्त प्रवाह का प्राकृतिक सर्किट टूट जाता है और हृदय में अनियमित सर्किट बन जाते हैं। कई बार समय पर शॉक देने से हृदय अपने सामान्य सर्किट को वापस पा लेता है, लेकिन कई बार समयाभाव के कारण ऐसा संभव नहीं हो पाता और मरीज की तत्काल मौत हो जाती है।
क्यों होता है, कैसे बचें
कोरोनरी आर्टरी जैसी रक्त प्रवाह की नलिकाओं में अतिरिक्त वसा के जमा होने से रक्त प्रवाह कम होने लगता है जिसके कारण ह्रदय के कार्य में बाधा आने लगती है। ठंड और प्रदूषण से यह स्थिति और अधिक गंभीर हो जाती है। इससे बचने के लिए वसा यानी फैट वाली चीजों को कम से कम खाना चाहिए। ठंड में बाहर निकलने से बचना चाहिए।
रक्त नलिकाओं में पानी की कमी होने से रक्त गाढ़ा होने लगता है जो परेशानी पैदा करता है। इसलिए रक्त को पतला बनाए रखने के लिए समय-समय पर गुनगुना पानी पीते रहना चाहिए। इन सबके आलावा अपने डॉक्टर से नियमित संपर्क में रहना चाहिए जिससे कोई असामयिक परेशानी पैदा न हो सके।