शिक्षा मंत्रालय ने राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान (रूसा) योजना को मार्च 2026 या फिर अगली समीक्षा तक (दोनों में से जो पहले आए) जारी रखने की अनुमति दे दी है। अधिकारियों ने शुक्रवार को यह जानकारी दी। इसका प्रारूप नई शिक्षा नीति की सिफारिशों को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है। रूसा राज्य सरकार के विश्वविद्यालयों और कॉलेजों को समानता, पहुंच और उत्कृष्टता के उद्देश्य उपलब्ध कराने हेतु वित्त पोषण के लिए एक केंद्र प्रायोजित योजना है।
मंत्रालय की ओर से जारी एक बयान के मुताबिक इसमें 12,929.16 करोड़ रुपये का खर्च आएगा। इसमें केंद्र की हिस्सेदारी 8120.97 करोड़ और राज्य की 4808.19 करोड़ रुपये रहेगी। योजना के नये चरण के तहत करीब 1600 परियोजनाओं को समर्थन देने की संकल्पना भी की गई है। इसमें राज्य सरकारों को नए मॉडल डिग्री कॉलेज बनाने के लिए सहयोग दिया जाएगा और बहु-विषयी शिक्षा और अनुसंधान के लिए राज्य के विश्वविद्यालयों को सहायता भी दी जाएगी।
बयान के अनुसार, रूसा योजना के नए चरण का लक्ष्य सुदूर व ग्रामीण इलाकों, दुर्गम भौगोलिक क्षेत्रों, वामपंथी चरमपंथ प्रभावित क्षेत्रों, पूर्वोत्तर, आकांक्षी जिलों, श्रेणी-2 के शहरों और कम सकल नामांकन दर वाले इलाकों तक लाभ पहुंचाना है। मंत्रालय ने आगे कहा कि इस योजना के नए चरण का प्रारूप नई शिक्षा नीति की उन सिफारिशों और उद्देश्यों को लागू करने के लिए तैयार किया गया है, जो कि वर्तमान उच्च शिक्षा प्रणाली में कुछ महत्वपूर्ण बदलावों का सुझाव देते हैं।
अधिकारियों ने बताया कि केंद्र सरकार की योजना इसके नए चरण के माध्यम से व्यवस्था में सुधार लाकर समानता और समावेशन के साथ गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा की सुविधा प्रदान करने की है। बयान में कहा गया है कि इस योजना के नए चरण के तहत लैंगिक समावेशिता, समानता संबंधी पहल, सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (आईसीटी), व्यावसायिक शिक्षा और कौशल उन्नयन के माध्यम से रोजगार की संभावना बढ़ाने के लिए राज्य सरकारों को सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।