जासूसी करने वाले सॉफ्टवेयर पेगासस के जरिए सरकारी एजेंसियों द्वारा पत्रकारों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, व्यापारियों और राजनेताओं की जासूसी कराने की खबरों पर एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया ने आश्चर्य जताया है। संगठन की ओर से बुधवार को जारी एक बयान में कहा गया कि बीते दिनों में 17 मीडिया संस्थानों द्वारा प्रकाशित रिपोर्ट्स इस ओर संकेत करती हैं कि पूरी दुनिया की कई सरकारें जासूसी करवा रही थीं।
एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया ने कहा कि चूंकि यह सॉफ्टवेयर बनाने वाली इस्राइल की कंपनी एनएसओ का दावा है कि यह इस सॉफ्टवेयर को केवल उन्हीं सरकारों को बेचती है जो इस्राइली सरकार से सत्यापित हैं। ऐसे में यह आशंका और गहरा गई है कि भारत सरकार की एजेंसियां अपने खुद के नागरिकों की जासूसी करने में संलिप्त रही हैं। यह अभिव्यक्ति और प्रेस की स्वतंत्रता पर एक असंवैधानिक हमला है।
संगठन ने कहा, जासूसी का यह कृत्य साफ तौर पर यह बताता है कि पत्रकारिता और राजनीतिक असहमति को अब 'आतंक' के साथ जोड़ दिया गया है। एक संवैधानिक लोकतंत्र कैसे जीवित रह सकता है यदि सरकारें अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की रक्षा के लिए प्रयास नहीं करती हैं और इस तरह की छूट के साथ निगरानी की अनुमति देती हैं? यह एक ऐसा क्षण है जो गहन आत्मनिरीक्षण और जांच की मांग करता है।