देश में सरसों की अच्छी पैदावार होने की उम्मीद के चलते खाद्य तेल के दाम में नरमी जारी रहने का अनुमान है। सरसों तेल की आवक बढ़ने की वजह से सोयाबीन व कॉटन तेल के दामों में भी फिलहाल कोई बढ़ोतरी नहीं होने जा रही है।
वेजिटेबल ऑयल एसोसिएशन के पदाधिकारियों के मुताबिक, सरसों की पैदावार पिछले साल से ज्यादा होने की उम्मीद है लेकिन असमय बारिश होने की वजह से सामान्य तौर पर जितनी पैदावार की आशा की जा रही थी, अब उससे कम होगी।
पिछले पांच साल का औसत उत्पादन लगभग 72 से 73 लाख टन बैठता है, जबकि इस साल अभी तक देश में पैदावार 66 से 69 लाख टन होने का अनुमान है। पिछले साल देश में सरसों का उत्पादन 62 लाख टन हुआ था।
खाद्य तेल के थोक कारोबारी हेमंत गुप्ता ने बताया कि पिछले साल के मुकाबले इस साल सरसों के उत्पादन में बढ़ोतरी की उम्मीद को देखते हुए, सरसों तेल का दाम पिछले माह से ही अपने न्यूनतम स्तर पर चल रहा है और अगले महीने तक इसमें बढ़ोतरी की कोई उम्मीद नहीं है।
इसकी मुख्य वजह है कि अप्रैल में सरसों की आवक सबसे अधिक होती है। वहीं सरसों तेल में नरमी के समर्थन से अन्य खाद्य तेलों के दामों में भी कोई इजाफा नहीं होने जा रहा है। थोक बाजार में सरसों तेल की कीमत अभी 72 रुपये प्रति किलोग्राम के आसपास चल रही है।
वहीं सोया तेल के भाव 65 रुपये प्रति किलोग्राम है। पाम ऑयल के भाव 55 रुपये प्रति किलोग्राम बताए जा रहे हैं। पी मार्क सरसों तेल के प्रवक्ता उमेश पुरी ने बताया कि सरसों तेल के दाम 90-105 रुपये प्रति किलोग्राम के बीच रहने की संभावना है जबकि पिछले साल सरसों तेल के दाम 120 रुपये प्रति लीटर को पार कर गये थे।
हालांकि मलेशिया व इंडोनेशिया में खराब मौसम की वजह से पाम ऑयल के दाम में पिछले दिनों थोड़ी बढ़ोतरी जरूर दर्ज की गई है। इस साल जनवरी मध्य तक पाम ऑयल की थोक कीमत 40 रुपये प्रति किलोग्राम के आसपास थी जो अभी 55 रुपये के स्तर पर है।