हरियाणा के कुरुक्षेत्र से सांसद राजकुमार सैनी का हश्र सांसद कीर्ति आजाद जैसा हो सकता है। पार्टी नेतृत्व जाट आरक्षण पर सैनी के आक्रामक रुख से बेहद खफा है। खासतौर पर सैनी की ओर से हरियाणा विधानसभा से पारित जाट आरक्षण बिल के खिलाफ अदालत का दरवाजा खटखटाने की घोषणा ने पार्टी नेतृत्व की नाराजगी बढ़ा दी है।
अगर सैनी ने वाकई इस मामले में अदालत का दरवाजा खटखटाया तो पार्टी उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई करेगी। हालांकि फिलहाल पार्टी 5 राज्यों में होने जा रहे विधानसभा चुनाव में उलझी है। इससे फुरसत पाने के बाद नेतृत्व सैनी के भविष्य का फैसला करेगा।
हिंसक आंदोलन के बाद मंगलवार को हरियाणा सरकार ने विधानसभा में बिल पारित कराकर जाट बिरादरी के लिए आरक्षण का मार्ग प्रशस्त किया है। सैनी ने इसी दिन इस फैसले का तीखा विरोध करते हुए इसे अवैध बताया और कोर्ट का दरवाजा खटखटाने की घोषणा की।
पार्टी सूत्रों ने बताया कि मोदी सरकार उत्तर प्रदेश में अगले साल होने जा रहे विधानसभा चुनाव के मद्देनजर किसी भी सूरत में जाट बिरादरी को नाराज नहीं करना चाहती। यही कारण है कि हाल में हुए हिंसक आंदोलन के कारण इस बिरादरी के खिलाफ गैर जाट बिरादरी में भड़की नाराजगी के बावजूद हरियाणा में इस बिरादरी के लिए आरक्षण की व्यवस्था की गई।
अडिग रहे सैनी तो होगी अनुशासनात्मक कार्रवाई
अगर इस बिल के खिलाफ सैनी कोर्ट गए और कोर्ट ने आरक्षण पर रोक लगाई तो इसका खामियाजा पार्टी को भुगतना पड़ेगा। चूंकि सैनी भाजपा के सांसद हैं, इसलिए विपक्ष पार्टी और सरकार पर जाटों को आरक्षण न देने का बहाना बनाने का आरोप लगाएगा।
यही कारण है कि पार्टी नेतृत्व सैनी के रुख से बेहद खफा है। चूंकि इस समय सभी नेता चुनाव प्रचार में व्यस्त हैं, इसलिए इससे फुरसत पाते ही पार्टी सैनी के मामले में गंभीरता से विचार विमर्श करेगी। अगर सैनी अपने रुख पर अडिग रहे तो पार्टी नेतृत्व एक अन्य सांसद कीर्ति आजाद की तरह ही उनके खिलाफ भी अनुशासनात्मक कार्रवाई करेगी।
भाजपा, केंद्र और हरियाणा सरकार जाटों को आरक्षण देने के लिए शुरू से प्रतिबद्ध रही है। यही कारण है कि इस संदर्भ में हरियाणा विधानसभा में बिल पारित कराकर वादा पूरा किया गया। जहां तक सैनी की पार्टी और सरकार की नीति के उलट आरक्षण का विरोध करने का सवाल है तो इस पर पार्टी संगठन उचित समय में फैसला करेगा।
-संजीव बालियान, केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री