मनी लॉन्ड्रिंग जैसे मामलों में गिरफ्तार चल रहे राकांपा नेता नवाब मलिक और अनिल देशमुख की अर्जी पर ईडी ने और समय मांगा है। दोनों नेताओं ने ईडी से महाराष्ट्र में होने वाले राज्यसभा चुनाव में वोट देने की इजाजत मांगी है। ईडी का कहना है कि अर्जियों पर विचार करने के लिए उन्हें और समय चाहिए। दोनों के मामले में अगली सुनवाई आठ जून को होनी है। ईडी को भी कल तक अपना जवाब दाखिल करना है।
वहीं मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने मंगलवार को महा विकास अघाड़ी के सभी विधायकों की बैठक बुलाई है। इसके बाद कांग्रेस ने भी अपनी पार्टी के विधायकों की बैठक अलग से बुलाई है जिसमें केंद्रीय पर्यवेक्षक के रूप में मल्लिकार्जुन खड़गे शामिल होंगे।
लिम्का बुक में जगह बनाए ईडी
उधर, राकांपा सांसद सुप्रिया सुले ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा, हमारे दो नेता (नवाब मलिक और अनिल देशमुख) जेल में हैं, जबकि उन्होंने कुछ नहीं किया है। देशमुख परिवार पर 109 बार छापेमारी करके ईडी को लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में जगह बनानी चाहिए। सुले ने कहा, आज या कल कोर्ट से उन्हें क्लीन चिट दे देगी। उन्होंने कहा, जो भी केंद्र के खिलाफ बोलता है, उस पर छापा पड़ता है।
21 अप्रैल 2021 को देशमुख के खिलाफ मामला हुआ था दर्ज
केंद्रीय जांच एजेंसी ने मुंबई के पूर्व पुलिस आयुक्त परम बीर सिंह द्वारा लगाए गए आरोपों के आधार पर 21 अप्रैल, 2021 को देशमुख के खिलाफ भ्रष्टाचार का मामला दर्ज किया था। 20 मार्च 2021 को महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को लिखे एक पत्र में सिंह ने आरोप लगाया था कि देशमुख ने सचिन वाजे सहित मुंबई के कुछ पुलिस अधिकारियों को मुंबई के रेस्तरां और बार से हर महीने 100 करोड़ रुपये जमा करने का निर्देश दिया था। सीबीआई ने बीते गुरुवार को सत्र अदालत में महाराष्ट्र के पूर्व गृह मंत्री अनिल देशमुख और उनके निजी सहायक संजीव पलांडे और कुंदन शिंदे के खिलाफ 59 पन्नों का आरोप पत्र दायर किया है।
फरवरी में गिरफ्तार हुए थे नवाब मलिक
राकांपा नेता को फरवरी में ईडी ने मनी लॉन्ड्रिग और आतंक वित्तपोषण के आरोप में गिरफ्तार किया था। ईडी ने अपनी चार्टशीट में कहा था कि उसके पास मलिक के अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम के गिरोह से संबंध होने के पुख्ता सबूत हैं। ईडी ने दाऊद के भांजे अली शाह का बयान धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) की धारा 50 के तहत दर्ज किया है। अली शाह ने अपने बयान में कहा, उसकी मां हसीना पारकर का दाऊद के साथ वित्तीय लेनदेन होता था। उसने सलीम पटेल का नाम लिया जो उसकी मां का सहयोगी था। पटेल प्याज का व्यापारी था और वह संपत्ति खरीदने-बेचने में उसकी मां के साथ शामिल था।