प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने 28 नवंबर से 30 नवंबर तक तक दिल्ली, गुरुग्राम, जोधपुर, झुंझुनू, हैदराबाद, पुणे और कोलकाता स्थित 13 परिसरों में मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए), 2002 के तहत रेड की थी। तलाशी में कई तरह के आपत्तिजनक दस्तावेज बरामद हुए। इनमें बैंक चेक बुक, एटीएम कार्ड, पैन कार्ड, डिजिटल हस्ताक्षर, ट्रस्ट वॉलेट सीक्रेट वाक्यांश और अस्पष्टीकृत नकदी बरामद की गई। कार्रवाई के दौरान विभिन्न बैंक खाते फ्रीज कर दिए गए हैं। ईडी ने रुपये की साइबर धोखाधड़ी के संबंध में सीबीआई, आर्थिक अपराध शाखा, दिल्ली द्वारा दर्ज दो एफआईआर के आधार पर जांच शुरू की थी।
इन अपराधों में सट्टेबाजी, जुआ, अंशकालिक नौकरियां और फिशिंग घोटाले, आदि के माध्यम से 640 करोड़ रुपये की आय हुई। इस राशि को बैंकों में जमा करा दिया गया। बाद में 5000 से अधिक भारतीय बैंक खातों के माध्यम से यह राशि निकाल ली गई। बाद में उसे 'संयुक्त अरब अमीरात' स्थित भुगतान प्लेटफार्म 'पीवाईवाईपीएल' पर अपलोड कर दिया गया।
साइबर धोखाधड़ी से कमाए गए पैसे का एक हिस्सा मास्टर/वीजा इंडियन बैंक एटीएम कार्ड के माध्यम से दुबई में नकद निकाला गया था। ईडी की जांच में कुछ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स (सीए), कंपनी सेक्रेटरी (सीएस) और क्रिप्टो ट्रेडर्स के गठजोड़ का खुलासा भी हुआ है। इन लोगों का काम अपराध की आय को ठिकाने लगाना था। इसके लिए ये सभी लोग, एक व्यवस्थित प्रारूप में मिलकर काम कर रहे थे। ईडी की कार्रवाई के दौरान दो चार्टर्ड अकाउंट्स अजय और विपिन यादव व एक क्रिप्टो व्यापारी जितेंद्र कासव को पीएमएलए के प्रावधानों के तहत गिरफ्तार किया है। आगे की जांच में इंस्टेंट मैसेजिंग ऐप्स पर करीबी चैट ग्रुप के माध्यम से विदेश में बैठे हैंडलर्स की सहायता से संचालित बड़े पैमाने पर मनी लॉन्ड्रिंग रैकेट का खुलासा हुआ है।
इन लोगों को खच्चर खाते खोलने, नकदी संचलन और क्रिप्टो की खरीद के संबंध में निर्देश, संचालकों द्वारा प्रदान किए जाते हैं। सैकड़ों बैंक खातों में डेबिट/क्रेडिट लेनदेन और क्रिप्टो करेंसी की खरीद का विवरण देने वाले 2000 से अधिक दस्तावेज बरामद किए गए हैं। जांच एजेंसी द्वारा इन खातों का विश्लेषण किया जा रहा है। बता दें कि पिछले दिनों इस मामले में मुख्य आरोपी सीए अशोक कुमार शर्मा के परिसर में ईडी की टीम ने जब तलाशी की तो उस पर हमला किया गया था। ईडी टीम को बलपूर्वक परिसर में प्रवेश करने से रोक दिया गया। इसके बाद जांच एजेंसी की शिकायत पर दिल्ली पुलिस ने एफआईआर दर्ज की थी। दिल्ली पुलिस ने मुख्य आरोपी, अशोक कुमार शर्मा के भाई राधे श्याम शर्मा को गिरफ्तार कर लिया है। राधे श्याम शर्मा अभी तक फरार है।