प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने गांधीनगर स्थित नेशनल फोरेंसिक साइंसेज यूनिवर्सिटी (एनएफएसयू) के साथ एक नया एग्रीमेंट (एमओए) साइन किया है। इससे साइबर फोरेंसिक और डिजिटल जांच की क्षमताओं में उनके लंबे समय से चले आ रहे सहयोग का दायरा और बढ़ेगा।
यह नया एग्रीमेंट 2021 में एनएफएसयू और ईडी के बीच हुए पिछले एग्रीमेंट पर आधारित है। उस पुराने एग्रीमेंट के तहत, एनएफएसयू ने अलग-अलग इलाकों में डिजिटल फोरेंसिक साइबर लैब बनाकर और उन्हें चलाकर ईडी की डिजिटल फोरेंसिक क्षमताओं को बढ़ाया था। पांच साल का वह कार्यकाल सफलतापूर्वक पूरा होने के बाद, अब यह नया एग्रीमेंट अगले पांच साल के लिए लागू होगा।
समझौते में क्या-क्या शामिल?
नए एग्रीमेंट के तहत, एनएफएसयू भारत में अलग-अलग जगहों पर ईडी के लिए साइबर फोरेंसिक लैब बनाने और उन्हें अपग्रेड करने के लिए कंसल्टेंसी सर्विस देगा। इसमें इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट, एडवांस्ड फोरेंसिक टूल्स, क्षमता निर्माण, ट्रेनिंग और डिजिटल फोरेंसिक, साइबर क्राइम की जांच और उससे जुड़े क्षेत्रों में टेक्निकल सपोर्ट शामिल है। एनएफएसयू, फोरेंसिक और उससे जुड़े विज्ञान के क्षेत्रों में प्रोजेक्ट्स और रिसर्च पर केंद्र और राज्य सरकारों के साथ मिलकर काम करता है। यह डिजिटल फोरेंसिक, मैलवेयर एनालिसिस, नेटवर्क फोरेंसिक और क्रिप्टो व ब्लॉकचेन ट्रेसिंग जैसे आधुनिक फाइनेंशियल क्राइम की जांच के लिए बेहद जरूरी क्षेत्रों में बेहतरीन विशेषज्ञता का एक नेशनल हब बनकर उभरा है।
वित्तीय अपराधों पर नकेस कसने में मिलेगी मदद
एनएफएसयू के खास शॉर्ट और लॉन्ग-टर्म ट्रेनिंग प्रोग्राम, जो उसकी एकेडमिक और रिसर्च क्षमता पर आधारित हैं, ईडी अधिकारियों को लेटेस्ट फोरेंसिक तरीकों में कुशल बनाना जारी रखेंगे। इससे यह पक्का होगा कि ईडी की टीम फाइनेंशियल और साइबर-क्राइम के बदलते स्वरूप के साथ कदम मिलाकर चल सके। यह नया सहयोग, डिजिटल और साइबर पहलुओं वाले फाइनेंशियल क्राइम से निपटने में अपनी तकनीकी और जांच क्षमताओं को मजबूत करने के लिए ईडी की लगातार प्रतिबद्धता को दिखाता है।
यह प्रतिबद्धता पीएमएलए (2002), फेमा (1999) और एफईक्यूए (2018) के तहत उसके अधिकार-क्षेत्र के अनुरूप है। यह साझेदारी आधुनिक फाइनेंशियल क्राइम की जांच में खास फोरेंसिक विशेषज्ञता के बढ़ते महत्व को भी रेखांकित करती है और देश में विश्व-स्तरीय साइबर फोरेंसिक इंफ्रास्ट्रक्चर बनाने के लिए दोनों संस्थानों की साझा प्रतिबद्धता को फिर से पुष्ट करती है।