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ED: गैंगस्टर ने डराकर 91 संपत्तियां कर ली अपने नाम, जो रजिस्ट्री करने से मना करता उसे कर लेता था अगवा

Wed, 28 Jan 2026 07:15 PM IST
अस्मिता त्रिपाठी डिजिटल ब्यूरो ,अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

गैंगस्टर नईमुद्दीन 'खाजा नईमुद्दीन उर्फ नईम', ये एक ऐसा नाम था, जिसकी नजर लोगों की संपत्तियों पर रहती थी। वह अपने साथियों और परिवार के सदस्यों के साथ मिलकर, लोगों को जान से मारने की धमकी देकर उनकी और उनके परिवार के सदस्यों की संपत्तियों का जबरन पंजीकरण करवाता था। 
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ED - फोटो : Adobe Stock
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विस्तार
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गैंगस्टर नईमुद्दीन 'खाजा नईमुद्दीन उर्फ नईम', ये एक ऐसा नाम था, जिसकी नजर लोगों की संपत्तियों पर रहती थी। वह अपने साथियों और परिवार के सदस्यों के साथ मिलकर, लोगों को जान से मारने की धमकी देकर उनकी और उनके परिवार के सदस्यों की संपत्तियों का जबरन पंजीकरण करवाता था। उसका तरीका यह था कि वह और उसके परिवार के सदस्य/सहयोगी, पहले लोगों की संपत्तियों की पहचान करते थे। फिर उनके मालिकों को धमकाकर संपत्तियों को नईमुद्दीन के साथियों या परिवार के सदस्यों के नाम पर बेचने/हस्तांतरित करने के लिए मजबूर करते। यदि कोई व्यक्ति यानी संपत्ति का मालिक उनकी मांगें नहीं मानता, तो वे उन्हें या उनके परिवार के सदस्यों को अगवा कर लेते थे। फिर उन पर दबाव डालकर उन्हें सब-रजिस्ट्रार कार्यालयों में लाते। वहां पर लोगों की संपत्तियों का पंजीकरण नईमुद्दीन के साथियों या उसके परिवार के सदस्यों के नाम पर कराया जाता था। 
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प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), हैदराबाद क्षेत्रीय कार्यालय ने तेलंगाना के रंगारेड्डी जिले की एमएसजे कोर्ट में पशम श्रीनिवास, हसीना बेगम, मोहम्मद थाहेरा बेगम, मोहम्मद सलीमा बेगम, मोहम्मद अब्दुल सलीम, अहेला बेगम, सैयद नीलोफर, फिरदौस अंजुम, मोहम्मद आरिफ और हीना कौसर के खिलाफ धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के प्रावधानों के तहत अभियोग शिकायत (पीसी) दायर की है। न्यायालय ने 21 जनवरी को पीसी का संज्ञान लिया है। तेलंगाना पुलिस द्वारा मोहम्मद अब्दुल फहीम, हसीना बेगम, पशम श्रीनिवास, मोहम्मद अब्दुल नासिर, थुम्मा श्रीनिवास, बी. श्रवण कुमार और सतीश रेड्डी के खिलाफ गैंगस्टर नईमुद्दीन और उसके साथियों द्वारा जबरन कब्जा करने और जमीन बेचने के मामले में दर्ज एफआईआर के आधार पर ईडी ने इस मामले की जांच शुरू की थी। 
ईडी को आयकर विभाग से भी बेनामी संपत्ति और लेनदेन निषेध अधिनियम, 1988 के तहत ख्वाजा नईमुद्दीन उर्फ नईम, हसीना बेगम, ताहिरा बेगम और अन्य के खिलाफ की गई कार्रवाई के संबंध में संदर्भ प्राप्त हुआ। यह कार्रवाई तेलंगाना सरकार द्वारा दिवंगत गैंगस्टर नईमुद्दीन और उसके साथियों द्वारा अवैध रूप से अर्जित अचल संपत्तियों की जांच के लिए गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) से प्राप्त जानकारी के आधार पर की गई थी। ईडी की जांच में पता चला है कि गैंगस्टर नईमुद्दीन 'खाजा नईमुद्दीन उर्फ नईम' अपने साथियों और परिवार के सदस्यों के साथ मिलकर, लोगों को जान से मारने की धमकी देकर उनकी और उनके परिवार के सदस्यों की संपत्तियों का जबरन पंजीकरण करवाता था। 
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ईडी की जांच में पता चला है कि दिवंगत गैंगस्टर नईमुद्दीन ने जबरन बिक्री विलेख पंजीकृत करवाकर अवैध रूप से अर्जित संपत्तियों को असली बताकर प्रदर्शित किया। हालांकि, विक्रेताओं को उनकी संपत्तियों की बिक्री के बदले कोई आर्थिक मुआवजा नहीं मिला। विक्रेताओं को इस हद तक धमकाया गया कि वे पुलिस या किसी अन्य प्राधिकरण में शिकायत दर्ज कराने की हिम्मत ही नहीं जुटा पाए। पशम श्रीनिवास नईमुद्दीन का करीबी सहयोगी था। उसने असली मालिकों से संपत्तियों की जबरन वसूली करने में उसके साथ मिलकर काम किया। संपत्तियों को जबरन नईमुद्दीन के सहयोगियों या परिवार के सदस्यों के नाम पर पंजीकृत करवाया। नईमुद्दीन ने उसे अपने परिवार के सदस्यों और सहयोगियों के नाम पर संपत्तियों के पंजीकरण का काम सौंपा था।

पीएमएलए जांच में पता चला है कि कुल 91 संपत्तियां जबरन दिवंगत गैंगस्टर नईमुद्दीन के परिवार के सदस्यों और सहयोगियों के नाम पर पंजीकृत की गई थीं। ये संपत्तियां अपराध की आय का प्रतिनिधित्व करती हैं, जो पीएमएलए के प्रावधानों के तहत कुर्की और परिणामस्वरूप केंद्र सरकार द्वारा जब्त किए जाने के योग्य हैं। हालांकि, चूंकि ये सभी संपत्तियां पहले से ही आयकर विभाग द्वारा बेनामी संपत्ति और लेनदेन निषेध अधिनियम, 1988 के तहत कुर्क की जा चुकी थीं, इसलिए पीएमएलए जांच के दौरान ईडी द्वारा इन्हें कुर्क नहीं किया गया। हालांकि, ईडी द्वारा दायर अभियोजन शिकायत में उक्त कुर्क की गई संपत्तियों को केंद्र सरकार द्वारा जब्त करने की प्रार्थना की गई है। 
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