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ईडी की कार्रवाई: आम्रपाली समूह के पूर्व निदेशक की संपत्तियां जब्त, फॉरेंसिक ऑडिटर ने दी सुप्रीम कोर्ट को जानकारी  

Mon, 14 Mar 2022 10:22 PM IST
Amit Mandal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

पीठ ने अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल संजय जैन से मिश्रा से जुड़ी संपत्तियों के बारे में पूछा, जिसमें उन्होंने स्वीकार किया कि संपत्ति को अस्थायी रूप से जब्त किया गया है।
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सुप्रीम कोर्ट में आम्रपाली मामले पर सुनवाई - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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आम्रपाली समूह के एक पूर्व निदेशक की संपत्तियों को ईडी ने अपराध की आय के रूप में जब्त किया है। सुप्रीम कोर्ट को सोमवार को अदालत द्वारा नियुक्त फोरेंसिक ऑडिटर ने यह जानकारी दी। फोरेंसिक ऑडिटर पवन अग्रवाल ने जस्टिस यूयू ललित और जस्टिस बेला एम त्रिवेदी की पीठ को बताया कि ईडी जिसे आम्रपाली समूह के पूर्व निदेशक प्रेम मिश्रा की संपत्ति होने का दावा कर रही है, असल में आम्रपाली मॉडर्न होम्स प्राइवेट लिमिटेड की संपत्ति थी, जिसने घर खरीदारों के पैसे की हेराफेरी कर बनाया गया है।

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आम्रपाली समूह और प्रेम मिश्रा के बीच लिखित समझौता था
उन्होंने कहा कि इन संपत्तियों को अलग कर कोर्ट रिसीवर आर वेंकटरमणि को सौंपने की जरूरत है ताकि रुकी हुई परियोजनाओं के निर्माण के लिए धन जुटाने के लिए खुले बाजार में नीलाम किया जा सके। अग्रवाल ने पीठ को बताया कि आम्रपाली समूह और प्रेम मिश्रा के बीच एक लिखित समझौता था जिसके तहत उन्हें लाभ 60:40 के अनुपात में साझा करना था, जो कानून के तहत स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने कहा कि आम्रपाली मॉडर्न होम प्राइवेट लिमिटेड सौ फीसदी आम्रपाली समूह की इकाई है जिसके लिए पैसा नोएडा में निर्मित परियोजनाओं से लिया गया था और मिश्रा व उनके परिवार के सदस्यों ने इसमें कोई राशि का निवेश नहीं किया है।

पीठ ने अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल संजय जैन से मिश्रा से जुड़ी संपत्तियों के बारे में पूछा, जिसमें उन्होंने स्वीकार किया कि संपत्ति को अस्थायी रूप से जब्त किया गया है क्योंकि वे अपराध की आय हैं। पीठ ने सख्त रुख अपनाते हुए जैन से कहा कि ईडी के अधिकारियों ने संभवत: उन संपत्तियों को कुर्क कर लिया है जो वास्तव में आम्रपाली समूह का हिस्सा थीं। एजेंसी के अधिकारियों ने पूरे मामले को समझे बिना और सभी पहलुओं की जांच करते हुए इसे मिश्रा के अपराध की आय के रूप में लेते हुए संपत्तियों को कुर्क करने की कार्रवाई शुरू कर दी है।
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मिश्रा की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता विकास सिंह ने कहा कि ईडी द्वारा जांच किए गई लेनदेन कथित तौर पर आपराधिक और दीवानी प्रकृति दोनों के हैं; हालांकि अस्थायी कुर्की आदेश आरोपी को सुने बिना पारित किया गया जो दीवानी है। उन्होंने ईडी की ओर से पक्षपात का आरोप लगाया और किसी भी बकाया राशि को चुकाने की पेशकश की, बशर्ते अधिकारी मिश्रा के खिलाफ मामला बंद कर दें। पीठ ने सिंह से सुनवाई की अगली तारीख तक यह स्पष्ट करने को कहा कि मिश्रा की कौन सी संपत्ति उनकी अपनी है और कौन सी संपत्ति आम्रपाली समूह की है।

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