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शिकंजा: पहले से ही जेल में बंद सुकेश चंद्रशेखर को ईडी ने किया गिरफ्तार, चुनाव आयोग को रिश्वत से जुड़ा है मामला

Mon, 04 Apr 2022 10:29 PM IST
Amit Mandal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

ईडी द्वारा गिरफ्तार सुकेश पहले से ही जेल में बंद है। जांच दल धन शोधन रोकथाम अधिनियम (पीएमएलए) के प्रावधानों के तहत चुनाव आयोग रिश्वत मामले में उसका बयान दर्ज करेगा। 
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सुकेश चंद्रशेखर - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने 2017 के चुनाव आयोग को रिश्वत मामले से जुड़े एक अन्य मनी लॉन्ड्रिंग मामले में जेल में बंद ठग सुकेश चंद्रशेखर को गिरफ्तार किया है। फोर्टिस हेल्थकेयर के पूर्व प्रमोटर शिविंदर मोहन सिंह की पत्नी अदिति सिंह सहित कई अमीर लोगों से धोखाधड़ी और जबरन वसूली करने के मामले में जांच एजेंसी ने उसे पिछले साल गिरफ्तार किया था, जिसके बाद से 32 वर्षीय सुकेश जेल में है। 2021 के इस मामले में कई बॉलीवुड अभिनेत्रियों और मॉडलों से ईडी ने चंद्रशेखर के साथ उनके कथित संबंधों के लिए पूछताछ की है। 

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2017 मामले में गिरफ्तार 
अधिकारियों ने कहा कि ईडी ने चंद्रशेखर को 2017 के मामले में गिरफ्तार किया था और कुछ दिन पहले उसे जेल में डाल दिया था, जबकि एक स्थानीय अदालत ने बाद में उसे एजेंसी की हिरासत में भेज दिया। उन्होंने कहा कि जांच दल धन शोधन रोकथाम अधिनियम (पीएमएलए) के प्रावधानों के तहत चुनाव आयोग रिश्वत मामले में उसका बयान दर्ज करेगा। 

2017 की दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा की एफआईआर का संज्ञान लेने के बाद ईडी द्वारा दर्ज किए गए आपराधिक मामले में नई गिरफ्तारी हुई है। चंद्रशेखर को अप्रैल 2017 में दिल्ली पुलिस ने तमिलनाडु की आरके नगर विधानसभा उपचुनाव के दौरान वीके शशिकला गुट के लिए अन्नाद्रमुक के 'दो पत्ते' का चुनाव चिह्न हासिल करने के लिए चुनाव आयोग (ईसी) के अधिकारियों को रिश्वत देने के लिए दिनाकरण से पैसे लेने के आरोप में एक पांच सितारा होटल से गिरफ्तार किया था। 
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चुनाव चिह्न के लिए चुनाव आयोग के अधिकारियों को कथित रूप से रिश्वत देने का प्रयास करने के आरोप में चार दिनों की पूछताछ के बाद दिल्ली पुलिस ने दिनाकरन को भी गिरफ्तार किया था। तमिलनाडु की तत्कालीन मुख्यमंत्री जे जयललिता के निधन के कारण उपचुनाव कराना पड़ा था। चुनाव आयोग ने अन्नाद्रमुक के चुनाव चिन्ह पर तब से रोक लगा दी थी जब दो धड़ों - एक का नेतृत्व दिनाकरन की चाची शशिकला और दूसरे गुट का नेतृत्व पूर्व मुख्यमंत्री ओ पनीरसेल्वम कर रहे थे। दोनों गुटों ने इस चुनाव चिन्ह पर दावा किया था। दिनाकरन के करीबी सहयोगी मल्लिकार्जुन को भी उनके और चंद्रशेखर के बीच 50 करोड़ रुपये के सौदे में मदद करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था।

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