ऑस्ट्रिया के प्रख्यात अर्थशास्त्री हेन्ज डी कुर्ज ने कहा है कि भ्रष्टाचार को जड़ से समाप्त करने के लिए नोटबंदी अधिक मजबूत कदम नहीं है। उन्होंने इस कदम को ‘पत्थर को अंडे से मारने’ का प्रयास करार दिया। उन्होंने कहा कि वास्तव में भारत सरकार ने भ्रष्टाचार के नए रास्ते खोले हैं।
कुर्ज ने कहा, ‘..जहां तक मैं स्थिति को समझता हूं यह (नोटबंदी) कदम ‘पत्थर को अंडे से मारने’ का प्रयास साबित हुआ है।’ उन्होंने कहा, ‘मुझे इस पर काफी संदेह है कि नोटबंदी भ्रष्टाचार को समाप्त कर देगी और अधिक पारदर्शिता लाएगी। यह कदम इन लक्ष्यों को हासिल करने के लिए काफी कमजोर और भरमाने वाला है।’ कुर्ज आस्ट्रेलिया में यूनिवर्सिटी ऑफ ग्राज में अर्थशास्त्र के प्रोफेसर हैं। उन्होंने कहा, ‘सरकार ने 2000 रुपये का नोट पेश किया है। यह प्रतिबंध नोट के मूल्य का दोगुना या चार गुना है... इसे बमुश्किल नोटबंदी कहा जा सकता है।’
नोटबंदी का भारत की आर्थिक वृद्धि पर प्रभाव के बारे में पूछे जाने पर कुर्ज ने कहा, ‘अभी नोटबंदी के प्रभाव का आकलन करना जल्दबाजी होगी।