मतदाता सूची में हेरफेर और डुप्लीकेट मतदाता पहचान पत्र को लेकर उठ रहे सवालों को लेकर चुनाव आयोग गंभीर है। चुनाव प्रक्रिया को मजबूत करने के लिए आयोग ने पिछले एक महीने में कई कदम उठाए हैं। आयोग ने गुरुवार को एक प्रेस विज्ञप्ति में नए मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के नेतृत्व में लिए गए अहम फैसलों की जानकारी दी।
आयोग ने कहा कि पिछले एक महीने में कई कदम उठाए हैं। लगभग एक करोड़ चुनाव अधिकारियों की निरंतर क्षमता वृद्धि के लिए डिजिटल प्रशिक्षण की योजना बनाई गई है। ईआरओ, डीईओ और सीईओ स्तर पर चुनाव अधिकारियों के साथ लगभग 5000 सर्वदलीय बैठकों के माध्यम से राजनीतिक दलों की भागीदारी बढ़ाने, आपत्तियों और अपीलों में सुधार और मतदाता सूची में नाम शामिल करने की प्रक्रिया पर जोर दिया गया है। इसके बाद अब तक केवल 89 प्रथम अपील और केवल 1 द्वितीय अपील दायर की गई है।
आयोग ने कहा कि मुख्य निर्वाचन आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के पदभार ग्रहण करने के एक महीने से भी कम समय में निर्वाचन आयुक्त डॉ. सुखबीर सिंह संधू और डॉ. विवेक जोशी के साथ चुनाव आयोग ने सभी मतदाताओं की भागीदारी को बढ़ावा देने और उन्हें मतदान केंद्रों तक लाने के लिए बीएलओ स्तर तक पूरे निर्वाचन तंत्र को सही रास्ते पर ला दिया है। राजनीतिक दलों को प्रमुख हितधारकों के रूप में जमीनी स्तर पर शामिल किया जा रहा है।
आयोग की ओर से कहा गया कि आधार और मतदाता पहचान पत्र को लिंक करने के लिए यूआईडीएआई और ईसीआई के विशेषज्ञों के बीच तकनीकी परामर्श जल्द ही शुरू होने वाले हैं। आयोग ने देश भर में ईपीआईसी नंबरों में डुप्लीकेट को हटाने और 3 महीने के भीतर दशकों पुराने मुद्दे को समाप्त करने का संकल्प लिया है। इसके अलावा जन्म और मृत्यु पंजीकरण अधिकारियों के समन्वय से मतदाता सूची को नियमित अपडेट किया जाएगा।
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चुनाव आयोग ने बताया कि राजनीतिक दलों के साथ बातचीत में स्पष्ट किया गया कि मतदाता सूची में किसी भी समावेश या विलोपन को जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 में सभी राजनीतिक दलों के लिए उपलब्ध दावों और आपत्तियों को दाखिल करने के लिए प्रासंगिक कानूनी प्रावधानों के तहत अपीलों की प्रक्रिया द्वारा नियंत्रित किया जाता है। ऐसी अपीलों के अभाव में, ईआरओ द्वारा तैयार की गई सूची मान्य होती है।
एक केंद्र पर 1200 से अधिक मतदाता रोकने के लिए चल रहा काम
आयोग ने कहा कि सभी पात्र नागरिकों का 100 फीसदी नामांकन, मतदान में आसानी करना हमारे प्रमुख उद्देश्य हैं। हम इस पर काम कर रहे हैं कि किसी भी मतदान केंद्र में 1,200 से अधिक मतदाता न हों और वे मतदाताओं के 2 किमी के भीतर हों। सबसे दूरस्थ ग्रामीण मतदान केंद्र में भी बुनियादी सुविधाएं होंगी। शहरी उदासीनता से निपटने और अधिक भागीदारी के लिए ऊंची इमारतों और कॉलोनियों के समूहों में भी उनके परिसर के भीतर मतदान केंद्र होंगे।
एक करोड़ चुनाव कर्मियों को देंगे डिजिटल प्रशिक्षण
लगभग एक करोड़ चुनाव कर्मियों को डिजिटल प्रशिक्षण देने की तैयारी की गई है। चुनावी हैंडबुक और निर्देशों के मैनुअल को नवीनतम परिवर्तनों के साथ बेहतर बनाया जाएगा। फ्रंटलाइन कर्मचारियों के लिए कई भारतीय भाषाओं में डिजिटल प्रशिक्षण किट तैयार किए जाएंगे। एनिमेटेड वीडियो और एकीकृत डैशबोर्ड प्रशिक्षण को डिजिटल प्रोत्साहन प्रदान करेंगे। बीएलओ को प्रशिक्षित करने के लिए एक प्रशिक्षण मॉड्यूल तैयार किया जा रहा है।
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31 मार्च तक होंगी सर्वदलीय बैठकें
आयोग ने कहा कि चुनाव प्रक्रिया में राजनीतिक दलों की पूरी भागीदारी के लिए चार मार्च को सीईओ सम्मेलन के दौरान सीईसी ज्ञानेश कुमार ने निर्देश दिया था कि सभी 36 सीईओ, 788 डीईओ, 4123 ईआरओ द्वारा नियमित सर्वदलीय बैठकें आयोजित की जाएं। इससे राजनीतिक दलों द्वारा जमीनी स्तर पर उठाए गए लंबित मुद्दों को हल करने में मदद मिलेगी। यह प्रक्रिया 31 मार्च 2025 तक पूरी की जानी है।
मतदाता सूची में दावों और आपत्तियों सहित चुनावी कानूनों के अनुसार उचित प्रक्रियाओं पर राजनीतिक दल के प्रतिनिधियों और उनके नियुक्त बीएलए को प्रशिक्षित करने के आयोग के प्रस्ताव का राजनीतिक दलों ने स्वागत किया है। आयोग ने चुनाव से संबंधित सभी मामलों पर राजनीतिक दलों से सुझाव भी आमंत्रित किए हैं। वे इन्हें 30 अप्रैल, 2025 तक भेज सकते हैं। दलों को सुविधाजनक समय पर दिल्ली में आयोग से मिलने का निमंत्रण भी दिया गया है।
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