आंध्र प्रदेश के पूर्व सीएम वाईएस जगन मोहन रेड्डी के नए बंगले को लेकर सियासत तेज हो गई है। आंध्र प्रदेश के आईटी मंत्री नारा लोकेश ने पूर्व सीएम रेड्डी की तुलना सद्दाम हुसैन से की है। पूर्व सीएम ने विशाखापत्तनम में रुशिकोंडा पहाड़ी पर महल बनवाया है।
आईटी मंत्री ने कहा कि वाईएसआरसीपी नेता ने सोचा था कि वह 30 साल तक सत्ता में रहेंगे। उन्होंने पर्यटकों को समुद्र तट के खूबसूरत नजारे से वंचित कर दिया। उन्हें लगा कि वह आंध्र के सद्दाम हुसैन हैं, इसलिए उन्होंने विशाल महल बनवाया। उन्होंने तीन भव्य इमारतें बनवाईं हैं। एक अपने लिए और दो अपनी बेटियों के लिए। साथ ही अपनी पत्नी के लिए एक विशेष कैंप ऑफिस भी बनवाया।
उन्होंने आरोप लगाया कि महल में बड़े हॉल, विशाल कमरे, महंगे इतालवी संगमरमर और शानदार फिटिंग शामिल हैं, जो सभी सार्वजनिक धन से वित्त पोषित हैं। इसके अतिरिक्त उनके 1,000 सुरक्षाकर्मियों के लिए एक विशाल घर बनाया गया था, क्योंकि जगन हमेशा डर में रहते थे।
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मंत्री ने कहा कि आंध्र प्रदेश पर्यटन विकास निगम (APTDC) ने महल पर 500 करोड़ रुपये खर्च किए हैं और पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) ने इसके निर्माण के लिए एक खूबसूरत पहाड़ी को काटने के लिए 200 करोड़ रुपये का जुर्माना भी लगाया है। जुर्माने के साथ इसकी कुल लागत 700 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है।
मंत्री ने कहा कि यह सब सिर्फ चार लोगों के लिए है, जबकि जगन की मां और बहन को परिवार से बाहर रखा गया है। यहां तक कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पास भी इतना भव्य महल नहीं है। पूर्व इराकी तानाशाह सद्दाम हुसैन को खूबसूरत महल बनवाने और आलीशान जीवनशैली जीने के लिए जाना जाता है।
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जगन का महल विवादों में क्यों, समझिए..
पूर्व सीएम जगम मोहन रेड्डी का आलीशान बंगला विवादों के घेरे में है। यह महल 10 एकड़ के विशाल क्षेत्र में फैला है। साथ ही इसमें चार बड़े ब्लॉक बनाए गए हैं। सभी ब्लॉक को अत्याधुनिक सुविधाओं और शानदार डिज़ाइन के साथ तैयार किया गया है। महल की बनावट को खास तौर पर सजाया और डिजाइन किया गया है। सत्तारूढ़ टीडीपी ने आरोप लगाया कि इस हवेली में लगाए गए बाथटब की कीमत 40 लाख रुपये है, और एक-एक कमोड की कीमत 10-12 लाख रुपये से अधिक बताई गई है। इसके साथ ही आरोप है कि इस हवेली ने तटीय विनियमन क्षेत्र (सीआरजेड) मानदंडों का घोर उल्लंघन किया है। टीडीपी का कहना है कि पिछली वाईएसआर कांग्रेस पार्टी (वाईएसआरसीपी) सरकार ने कानूनी दिशा-निर्देशों को नजरअंदाज किया।