असम के परिसीमन मसौदा प्रस्ताव पर अपनी तीन दिवसीय जनसुनवाई में चुनाव आयोग को विभिन्न समूहों से 1,200 से अधिक विचार मिले हैं। जिनको लेकर चुनाव आयोग मूल्यांकन करेगा। लोगों ने विधानसभा क्षेत्रों का नाम बदलने जैसे मामलों पर अलग-अलग विचार साझा किए हैं।
एक अधिकारी के अनुसार, प्रत्येक व्यक्ति ने विधानसभा और संसदीय निर्वाचन क्षेत्रों को फिर से तैयार करने के लिए परिसीमन प्रक्रिया से संबंधित कई मुद्दों पर अपने दृष्टिकोण प्रस्तुत किए। राजनीतिक दलों, जातीय संगठनों, सामाजिक और सांस्कृतिक समूहों और व्यक्तिगत नागरिकों ने चुनाव पैनल के समक्ष 1,200 से अधिक अभ्यावेदन दिए। लोकसभा और विधानसभा सीटों की संख्या बढ़ाने के लिए कुछ अभ्यावेदन दिए गए। लेकिन कुछ मांगें परिसीमन प्रक्रिया की सीमा से परे हैं।
एक अधिकारी ने कहा कि सार्वजनिक सुनवाई के दौरान, विभिन्न समूहों ने एक विशेष मामले पर परस्पर विरोधी विचार साझा किए। समूहों की कुछ मांगें थीं जो परिसीमन की सीमा से परे थीं। लेकिन चुनाव आयोग परिसीमन अभ्यास के लिए अलग-अलग विचारों वाले विभिन्न समूहों को एक मेज पर लाने में सक्षम था। कुछ भिन्न विचारों का उदाहरण देते हुए, अधिकारी ने कहा कि केंद्रीय कोच राजबंगशी लोक संस्कृति समिति ने मांग की कि "भवानीपुर" विधानसभा सीट का नाम बदलकर "बारनगर" कर दिया जाए, जबकि चकचका ब्लॉक कांग्रेस कमेटी चाहती थी कि इसका नाम "सोरभोग" रखा जाए।
समूहों में से एक "आनंद दास और 24 अन्य" चाहते थे कि डिमोरिया विधानसभा क्षेत्र का नाम बदलकर प्रागज्योतिषपुर कर दिया जाए, लेकिन दूसरे समूह ने इसका विरोध किया। यूनाइटेड कार्बी सिटीजन काउंसिल और अमरी कार्बी नेशनल काउंसिल चाहते थे कि डिमोरिया विधानसभा सीट अनुसूचित जनजाति (एसटी) के लिए आरक्षित की जाए, जबकि असम प्लेन कार्बी अदरबार और डिमोरिया जिला जनजातीय संघ समिति चाहते थे कि निर्वाचन क्षेत्र को अनारक्षित किया जाए।
अधिकारी ने कहा कि आयोग ने हर आवाज को सुना क्योंकि अलग-अलग तरह की राय आई थी। हर विचार को नोट करना महत्वपूर्ण था। परिसीमन का मसौदा तैयार होने से पहले भी, मुख्य चुनाव आयुक्त (राजीव कुमार) ने अधिकतम संख्या में विचारों को ध्यान में रखना सुनिश्चित करने के लिए लोगों के विभिन्न वर्गों के साथ बातचीत करने पर जोर दिया था।
निर्वाचन आयोग ने 20 जून को परिसीममन मसौदा दस्तावेज जारी किया था और असम में विधानसभा क्षेत्रों की संख्या 126 तथा लोकसभा क्षेत्रों की संख्या 14 बरकरार रखी। राज्य में राज्यसभा की सात सीट हैं। मसौदे के अनुसार अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित विधानसभा सीट आठ से बढ़ाकर नौ तथा अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित विधानसभा सीट 16 से बढ़ाकर 19 कर दी हैं। लोकसभा की दो सीट अनुसूचित जनजाति तथा एक सीट अनूसूजित जाति के लिए आरक्षित की गई है।