विनाशकारी भूकंप ने वहां के खेतिहर मजदूर सूर्यवंशी तानाजी को दोहरी क्षति पहुंचाई थी। तानाजी ने न केवल अपने परिजनों को खोया बल्कि सरकार ने उनकी 6.5 एकड़ जमीन को पुनर्वास के नाम पर ले लिया। अब वह पत्नी और 13 साल के बेटे के साथ टिन की छत वाली झोपड़ी में रहते हैं। उनका कहना है कि उन्हें आज तक कोई मुआवजा नहीं मिला।
सूर्यवंशी का कहना है कि 30 सितंबर का दिन किल्लारी के लोगों के लिए ‘काला दिन’ है। भयानक त्रासदी की सालगिरह पर पूरा गांव इस दिन बंद हो जाता है। इस आपदा को याद करते हुए उन्होंने बताया कि वह गणेश विसर्जन के जुलूस में थे जब यह प्राकृतिक आपदा आई थी। वह घर की तरफ भागे, लेकिन उनका घर मलबे में तब्दील हो चुका था।
उन्होंने किसी तरह पत्नी, मां और भाई को मलबे से बाहर निकाला लेकिन उनके पिता, 10 साल का बेटा, उसके भाई के तीन बच्चे और भाभी की मौत हो चुकी थी। बाद में उसके भाई और मां ने भी दम तोड़ दिया। उन्होंने बताया कि वह अदालत भी गए लेकिन न्याय नहीं मिल सका।
किल्लारी के एक अन्य निवासी प्रशांत हरांगुले का घर भी इस आपदा की चपेट में आकर क्षतिग्रस्त हो गया था। उनके परिवार के सदस्य घायल हो गए थे। वह बताते हैं कि उस वक्त हर पांच मिनट में भूकंप के झटके महसूस हो रहे थे। उन्होंने बताया कि उनके पिता साहसी व्यक्ति थे। वह कहते थे भगवान पर भरोसा रखो और जिंदगी में आगे बढ़ो।