वायुमंडलीय प्रक्रियाओं का अध्ययन करने के लिए पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय 250 करोड़ रुपये की लागत से अनुसंधान कार्य के लिए वैज्ञानिक उपकरणों से सुज्जित विमान की खरीद पर विचार कर रहा है। इस बात की जानकारी केंद्रीय विज्ञान मंत्री डॉक्टर हर्षवर्धन ने लोकसभा में एक सवाल के जवाब में दी।
यह विशेष विमान नेशनल फैसिलिटी फॉर एयरबोर्न रिसर्च का हिस्सा होगा, जिसकी स्थापना मंत्रालय करेगा। वैज्ञानिक उपकरणों लैस विमान भौतिकी, एयरोसोल और वायु रसायन विज्ञान सहित आकाश के विभिन्न वायुमंडलीय मापदंडों का अध्ययन करने में मदद करेगा। इससे वर्तमान मौसम और जलवायु मॉडल को मजबूती मिलेगी।
केंद्रीय मंत्री ने राज्यसभा में जवाब देते हुए कहा, ‘यह विमान मानसून या उष्णकटिबंधीय बादलों के मॉडल भौतिकी में सुधार के लिए क्लाउड स्कीम को सत्यापित करने में उपयोगी हो सकता है। यह भारत में वायु प्रदूषण के आकलन और संबद्ध प्रभावों (स्वास्थ्य, दृश्यता, जलवायु) का पता लगाने में उपयोगी होगा।’
पुणे में स्थित भारत का उष्णकटिबंधीय मौसम विज्ञान संस्थान (आईआईटीएम), पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के तहत एक स्वायत्त संस्थान है, यह सूचनाओं के संग्रह और प्रसार के लिए नोडल निकाय के रूप में कार्य करेगा। नेशनल फैसिलिटी फॉर एयरबोर्न रिसर्च की स्थापना को आर्थिक मामलों की कैबिनेट समिति ने 2018 में वर्ष 2020-21 के दौरान 130 करोड़ की वित्तीय प्रतिबद्धता के साथ मंजूरी दी थी।
ये फैसिलिटी ‘वायुमंडल और जलवायु अनुसंधान-मॉडलिंग अवलोकन प्रणाली और सेवाओं’ (एसीआरओएसएस) के तहत आएगी। एसीआरओएसएस में पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के वायुमंडलीय विज्ञान कार्यक्रम शामिल हैं, जिसमें मौसम और जलवायु के विभिन्न पहलुओं, चक्रवात के लिए चेतावनी, तूफान, गर्मी की लहरें, गरज का पता लगाया जाता है।