विदेश मंत्री एस जयशंकर ने सोमवार को अफगानिस्तान में शांति और स्थिरता लाने के लिए समावेशी, "अफगान नेतृत्व वाली, अफगान-स्वामित्व वाली और अफगान-नियंत्रित" सुलह प्रक्रिया के भारत के रुख को दोहराया। गुजरात के सूरत में विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर ने 'मोदी@20: ड्रीम्स मीट डिलीवरी' पुस्तक पर चर्चा के दौरान "वैश्विक मामलों में भारत की भूमिका पर बातचीत" में एक मीडिया ब्रीफिंग में बोलते हुए कहा कि "अफगानिस्तान में दुखद चीजें हो रही हैं... लेकिन भारत तय नहीं कर सकता कि अफगानिस्तान में क्या हो रहा है, अफगानों को यह तय करना होगा कि अफगानिस्तान में क्या हो रहा है। भारत मुश्किल समय में अफगान लोगों की मदद कर सकता है।"
गौरतलब है कि जब से तालिबान ने अफगानिस्तान पर कब्जा किया है, देश को मानवाधिकारों, महिलाओं के अधिकारों और धार्मिक स्वतंत्रता में भारी गिरावट का सामना करना पड़ रहा है। पिछले साल 15 अगस्त को तालिबान के सत्ता में आने के बाद से तालिबानी अधिकारियों के अत्याचारों ने देश के हिंदू और सिख अल्पसंख्यकों को उत्पीड़न से बचने के लिए भागने को मजबूर कर दिया है। लैंगिक अल्पसंख्यक या तो भाग गए हैं या दूसरे देशों में चले गए हैं। महिलाएं या तो भाग गईं हैं या इन्हें दूसरे देशों में ले जाया गया।
विशेष रूप से, अफगान महिलाएं अपने जीवन के कई पहलुओं को नियंत्रित करने वाले तालिबान द्वारा लगाए गए कई प्रतिबंधों के कारण एक अंधकारमय भविष्य की ओर देख रही हैं, जिसमें छठी कक्षा से ऊपर की लड़कियों को शिक्षा से वंचित करना शामिल है। उन्हें नौकरी करने की अनुमति नहीं है, महिलाओं को अब यात्रा करने की अनुमति नहीं है जब तक कि उनके साथ उनके संबंधी पुरुष न हों और उन्हें मेकअप करने के साथ-साथ उनके प्रजनन अधिकारों से भी वंचित कर दिया गया है। अधिकांश अंतर्राष्ट्रीय समुदाय द्वारा मान्यता प्राप्त नहीं होने के कारण तालिबान के नेतृत्व वाली सरकार बुनियादी मानवाधिकारों को कम करने के लिए प्रतिबद्ध है। इसलिए अफगानिस्तान के नागरिक देश में एक दयनीय जीवन जी रहे हैं।
जयशंकर ने कहा कि "हमें आज अपने पड़ोसियों के साथ काम करना है... हमारे पड़ोसी हमारे साथ सहज हैं... लेकिन हमें यह भी समझना चाहिए कि पड़ोसी यह देखना चाहेंगे कि उन्हें कहां से फायदा हो सकता है।" उन्होंने कहा कि भारत अफगानिस्तान में राजनीतिक स्पेक्ट्रम के सभी वर्गों से एक समृद्ध और सुरक्षित भविष्य के लिए अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों सहित उस देश के सभी लोगों की आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए मिलकर काम करने का आह्वान करता रहा है।
उन्होंने सार्वजनिक सेवाओं के डिजिटलीकरण में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रयासों की भी सराहना की। गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में उनके कार्यकाल को याद करते हुए उन्होंने कहा कि आधार की शक्ति को समझने वाले मोदी एकमात्र सीएम थे। इसकी वजह से, प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण संभव हो सका। कोविन पोर्टल, पीएम आवास योजना, पीएम गरीब कल्याण योजना- कुछ भी इसके बिना संभव नहीं होता। जयशंकर ने कहा कि प्रधानमंत्री जी ने विदेशों में रहने वाले भारतीयों में विश्वास की भावना जगाई है। सबका साथ, सबका विकास, सबकी सुरक्षा उनके कार्यकाल की एक सचाई है।
जयशंकर ने रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान भारतीय नागरिकों को निकालने के अनुभव को भी साझा किया। उन्होंने कहा कि पीएम मोदी ने रूस और यूक्रेन के नेताओं से युद्ध क्षेत्रों में फंसे भारतीय छात्रों की सुरक्षित वापसी का आश्वासन देने का आह्वान किया था। जयशंकर ने कहा कि "पीएम मोदी ने राष्ट्रपति पुतिन और जेलेंस्की को फोन किया, उनसे कहा कि हमारे बच्चे यूक्रेन के सुमी और खारकीव में फंस गए हैं ... आश्वासन मिला कि उस अवधि के दौरान गोलीबारी नहीं होगी और इस तरह हम अपने बच्चों को बाहर निकालने में सक्षम हुए।
सूरत में लाइव ऑडियंस के सामने बोलते हुए जयशंकर ने कहा कि कोविड-19, जलवायु परिवर्तन और रूस-यूक्रेन संघर्ष के कारण अनिश्चित वैश्विक परिदृश्य के बावजूद भारत दुनिया भर में मजबूत व्यापारिक भावना को प्रदर्शित करना जारी रखा है।
जयशंकर ने ट्वीट कर कहा कि आज सूरत में 'मोदी@20: ड्रीम्स मीट डिलीवरी' पुस्तक पर चर्चा करने का अवसर मिला। प्रधानमंत्री जी से मेरे पहले संपर्क का विषय सूरत से संबंधित था। उन्होंने एक अन्य ट्वीट में कहा कि खुद लता मंगेशकर जी ने उन्हें जन आंदोलन और लोगों को एक साथ लेकर चलने का श्रेय दिया है, अमित शाह जी ने उनकी दूरदृष्टि और बड़े पैमाने पर प्रदर्शन करने की क्षमता की प्रशंसा की है। कोटक महिंद्रा बैंक के प्रबंध निदेशक उदय कोटक उनकी सामाजिक रूप से समावेशी व्यापार विकास की बात करते हैं और इंफोसिस के गैर-कार्यकारी अध्यक्ष नंदन नीलेकणी उनके डिजिटल शासन के बारे में समझाते हैं।