EAM: कठिन सवालों पर अपनी बेहद ही तीखी प्रतिक्रियाओं के लिए प्रसिद्ध भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने एक समाचार चैनल के साथ साक्षात्कार के दौरान पहले अमेरिका के साथ भारत के विकसित होते संबंधों पर बात की और आलोचकों के खिलाफ पीएम मोदी का बचाव किया है।
भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर से जब एक समाचार चैनल में सात्क्षाकार के दौरान पूछा गया कि रात्रिभोज (डिनर) किसके साथ करना पसंद करेंगे, किम जोंग उन या जॉर्ज सोरोस? इस पर जो जवाब उन्होंने दिया वह सोशल मीडिया पर काफी तेजी से वायरल हो रहा है।
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नवरात्रि चल रही है, और मेरा व्रत है- जयशंकर
दरअसल एक कार्यक्रम के दौरान जब विदेश मंत्री एस. जयशंकर से ये सवाल पूछा गया, तो उन्होंने कहा कि, नवरात्रि चल रही है, और मेरा व्रत है। इसके बाद तो तालियों की गड़गड़ाहट से पूरा हॉल गूंज उठा। बता दें कि उत्तर कोरियाई के शासक किम जोंग उन और हंगेरियन-अमेरिकी व्यवसायी, निवेशक जॉर्ज सोरोस के साथ डिनर पर विदेश मंत्री की ये प्रतिक्रिया काफी तेजी से वायरल हो रहा है। बता दें कि अमेरिकी बिजनेसमेन जॉर्ज सोरोस प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आलोचक रह चुके हैं और कई मौकों पर भाजपा ने उनके बयानों का जिक्र कर भारतीय लोकतंत्र में हस्तक्षेप करने का आरोप भी लगाया है।
रूस-यूक्रेन संघर्ष पर जयशंकर का बयान
रूस-यूक्रेन संघर्ष में मध्यस्थता में भारत की भूमिका पर एक सवाल के जवाब में विदेश मंत्री ने कहा, हम क्या करने की कोशिश कर रहे हैं? आपको जरूरी नहीं कि मध्यस्थता करनी पड़े, कभी-कभी आपको बातचीत करनी पड़ती है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रूस और यूक्रेन के शीर्ष नेताओं के साथ मुलाकातें गंभीर संघर्ष में उलझे दो देशों के बीच बातचीत प्रक्रिया की शुरुआत थीं।
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पश्चिम एशिया में संघर्ष पर बोले विदेश मंत्री
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा कि आज स्थिति यह है कि चाहे वह यूक्रेन का संघर्ष हो या पश्चिम एशिया का...दोनों अस्थिरता के बड़े कारक और चिंता का विषय हैं। पूरी दुनिया जिसमें हम भी शामिल हैं, इस पर चिंतित है। उन्होंने कहा कि एक भूमंडलीकृत दुनिया में किसी भी जगह संघर्ष होने से सभी जगह समस्याएं पैदा होती हैं।
दक्षेस शिखर सम्मेलन को पाकिस्तान पर बरसे जयशंकर
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन (दक्षेस) को लेकर अहम टिप्पणी की है। विदेश मंत्री ने शनिवार को कहा कि दक्षेस आगे नहीं बढ़ रहा है और पिछले कुछ साल में इसकी बैठकें भी नहीं हुई हैं क्योंकि इस क्षेत्रीय समूह का एक सदस्य सीमा पार आतंकवाद को लगातार बढ़ावा दे रहा है।