विदेश मंत्री डॉ एस जयशंकर ने महाराष्ट्र के नागपुर में आयोजित एक कार्यक्रम में दावा किया कि दुनिया में कोई भी बड़ा मुद्दा भारत के साथ परामर्श के बिना तय नहीं किया जाता है। उन्होंने कहा कि अब हम बदल गए हैं और हमारे प्रति दुनिया का नजरिया भी बदल गया है। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) से जुड़े बिंदु पर विदेश मंत्री ने कहा, संयुक्त राष्ट्र की इस इकाई में भारत की जरूरत पूरी दुनिया महसूस कर रही है।
संबंधों को सामान्य करने पर चीनी समकक्ष को समझाया
जयशंकर ने भारत और चीन के संबंधों पर भी जवाब दिया। नौवीं कक्षा के बच्चे भार्गव देशपांडे के सवाल पर कहा, उन्होंने अपने चीनी समकक्ष को समझाया है कि जब तक आप सीमा से जुड़े मुद्दे का कोई समाधान नहीं निकाल लेते, अगर सेनाएं आमने-सामने रहेंगी और तनाव रहेगा, तो आपको यह उम्मीद नहीं करनी चाहिए कि बाकी रिश्ते, मसलन बिजनेस और दूसरी चीजें सामान्य तरीके से चलेंगी। उन्होंने गलवान घाटी में हुई हिंसक झड़प का भी जिक्र किया। विदेश मंत्री ने कहा कि पिछले तीन साल से दोनों देशों के संबंध सामान्य नहीं हैं। तनाव बना हुआ है। इस बात को स्वीकार करने में उन्हे कोई हिचक नहीं है।
विदेश मंत्री ने चीन के साथ समझौतों का जिक्र किया
उन्होंने कहा कि दोनों देश इस बात को जानते हैं कि सीमावर्ती इलाकों में शांति और सामान्य हालात बनाए रखने में पड़ोसी देश की भूमिका अहम होती है। उन्होंने कहा कि सालों से बेहद स्पष्ट समझौतों का पालन किया जाता रहा है। हालांकि, 1962 के युद्ध के बाद कई वर्षों तक तनाव बना रहा। 14 साल बाद भारत ने बीजिंग में राजदूत भेजा। 1962 की लड़ाई के 26 साल बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री- राजीव गांधी चीन दौरे पर पहुंचे।
कूटनीतिक स्तर पर मंथन का दौर जारी
बकौल जयशंकर, भारत और चीन के बीच सैन्य गतिविधियों पर भी समझौते हुए हैं। 2020 में चीन ने इसका उल्लंघन किया। गलवान में कोरोना महामारी के बावजूद बड़ी संख्या में सैनिकों को तैनात किया। उस समय से दोनों देशों की सेनाएं आमने-सामने हैं। बकौल जयशंकर, भारत ने समझौते का उल्लंघन नहीं किया है, लेकिन अपनी सुरक्षा के लिए पर्याप्त तैनाती करनी ही होगी। कूटनीतिक स्तर पर मंथन का दौर जारी है। कई बार जल्दबाजी में समाधान नहीं किए जा सकते। हालात सामान्य बनाने की कोशिशें जारी हैं।
संयुक्त राष्ट्र में भारत की सदस्यता पर क्या बोले?
UNSC में भारत के लिए स्थायी सीट के सवाल पर विदेश मंत्री ने कहा कि हर गुजरते साल के साथ दुनिया को लगता है कि भारत को भी यूएनएससी का स्थायी सदस्य होना चाहिए। उन्होंने कहा कि वे विदेश मंत्री की हैसियत से दुनियाभर से मिल रहे इस समर्थन को महसूस कर सकते हैं।
भारत स्वतंत्र देश, कई बार लड़ना पड़ता है
नागपुर में सार्वजनिक चर्चा सरीखे मंच- टाउनहॉल मंथन में विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा कि कई बार ऐसा होता है जब दुनिया आपको इतनी आसानी से कोई चीज नहीं देती है. कभी-कभी आपको इसके लिए लड़ना भी पड़ता है। भारत के क्वाड और ब्रिक्स जैसे विभिन्न समूहों का हिस्सा होने के बारे में एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा, भारत स्वतंत्र देश है, इसलिए हमें यह सीखने की जरूरत है कि कैसे अलग-अलग लोगों के साथ अलग-अलग तरीके से अपने हितों का ध्यान रखा जाए।
RSS के संस्थापक को दी श्रद्धांजलि
मंथन कार्यक्रम से पहले विदेश मंत्री डॉ एस जयशंकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म- एक्स पर फोटो शेकर की। उन्होंने बताया कि नागपुर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संस्थापक परम पूजनीय डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार और परम पूजनीय गुरुजी को स्मृति मंदिर में श्रद्धांजलि अर्पित की।