आकाशवाणी पर ‘मन की बात’ कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मानसून में देरी और देश के कई हिस्सों के सूखे की चपेट में आने पर चिंता जताई। उन्होंने इस समस्या से निपटने के लिए पानी की एक-एक बूंद बचाने और पर्यावरण रक्षा की अपील की। इस दौरान उन्होंने पानी बचाने के लिए खेती के तरीके बदलने और कम पानी से होने वाली फसलों को बोने का भी सुझाव दिया। प्रधानमंत्री ने 12वीं की परीक्षा में सफलता का परचम लहराने वाली बेटियों की भी तारीफ की। साथ ही सफलता हासिल करने से चूक गए बच्चों को असफलता से न घबराने और ऐसे बच्चों के माता पिता को अनावश्यक दबाव न बनाने का सुझाव दिया।
‘मन की बात’ कार्यक्रम के 20वें संस्करण में पीएम मोदी ने पानी और पर्यावरण पर खासतौर से अपनी बात रखी। उन्होंने मानसून में देरी और सूखे पर गंभीर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि पानी और पर्यावरण पर गंभीर चर्चा का समय आ गया है। हमें यह समझना होगा कि मानव जाति ने प्रकृति का विनाश करके खुद के विनाश का रास्ता तैयार किया है। हाल के दिनों में मुख्यमंत्रियों के साथ सूखे की समस्या की समीक्षा करने वाले पीएम ने कहा कि कई राज्यों ने जल संरक्षण कि दिशा में शानदार काम किया है।
उन्होंने नीति आयोग से राज्यों के बेहतरीन पहल का अध्ययन करने को कहा है। उन्होंने कहा कि अब पांच जून को आने वाले विश्व पर्यावरण दिवस पर हमें पानी और पर्यावरण की रक्षा का संकल्प लेना होगा। आने वाले बरसात के चार महीनों में हमें पानी की बूंद-बूंद का सही इस्तेमाल करना होगा। पीएम मोदी ने इस दौरान खेती के तरीके बदलने की भी वकालत की। उन्होंने कहा कि अब हमें कम पानी वाली फसलों, माइक्रो तकनीक से सिंचाई और पर ड्रॉप मोर क्रॉप जैसे नुस्खे आजमाने होंगे। इस दौरान प्रधानमंत्री ने सूखे से निपटने के केंद्र के प्रयासों की भी चर्चा की।