भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़ी मात्रा में कच्चे तेल का आयात करता है। ऐसे में पेट्रोल में 20 प्रतिशत इथेनॉल मिलाने वाले ई20 ईंधन को देश की विदेशी तेल पर निर्भरता कम करने के एक विकल्प के तौर पर देखा जा रहा है। ओएनजीसी के निदेशक (एक्सप्लोरेशन) ओम प्रकाश सिन्हा ने सोमवार को कहा कि अगर ई20 पेट्रोल का इस्तेमाल बिना उपभोक्ताओं को परेशानी दिए सफलतापूर्वक किया जाता है, तो इससे भारत के आयात में काफी कमी आ सकती है और देश की आत्मनिर्भरता बढ़ सकती है।
सिन्हा अहमदाबाद स्थित ओएनजीसी इंस्टीट्यूट ऑफ रिजर्वायर स्टडीज में इंडिया एनर्जी वीक 2027 के कर्टेन रेजर कार्यक्रम में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि ई20 पेट्रोल एक चुनौती है, लेकिन तकनीक के जरिए इसका समाधान निकाला जा सकता है। उनके मुताबिक भारत अपनी जरूरत का करीब 90 प्रतिशत तेल आयात करता है। ऐसे में पेट्रोल में 20 प्रतिशत इथेनॉल मिलाने की व्यवस्था सफल रहती है और इससे उपभोक्ताओं को कोई परेशानी नहीं होती, तो आयात पर इसका असर काफी बड़ा हो सकता है। उन्होंने कहा कि इससे भारत की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में आत्मनिर्भरता बढ़ेगी।
क्या ई20 पेट्रोल से भारत का तेल आयात वास्तव में घट सकता है?
सिन्हा के मुताबिक ई20 में पेट्रोल के साथ 20 प्रतिशत इथेनॉल मिलाया जाता है। इसका सीधा मतलब यह है कि पेट्रोल की जरूरत का एक हिस्सा इथेनॉल से पूरा किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि भारत करीब 90 प्रतिशत तेल आयात करता है, इसलिए मिश्रण की यह व्यवस्था सफल होने पर आयात की जरूरत में महत्वपूर्ण कमी आ सकती है। हालांकि उन्होंने यह भी माना कि ई20 पेट्रोल के सामने तकनीकी चुनौतियां हैं। उनका कहना है कि तकनीक के इस्तेमाल से इन चुनौतियों का समाधान निकाला जा सकता है। यानी ई20 को केवल ईंधन में बदलाव के तौर पर नहीं, बल्कि आयात घटाने और ऊर्जा आत्मनिर्भरता बढ़ाने के विकल्प के रूप में देखा जा रहा है।
पश्चिम एशिया के युद्ध ने भारत के सामने ऊर्जा सुरक्षा का सवाल क्यों बढ़ाया?
सिन्हा ने कहा कि पश्चिम एशिया में युद्ध के बीच कई देशों को विदेशी स्रोतों पर अपनी निर्भरता कम करने की जरूरत महसूस हो रही है। उन्होंने कहा कि किसी एक स्रोत या रास्ते पर निर्भर रहने के बजाय कई विकल्प तैयार रखना जरूरी है। अगर किसी एक रास्ते में परेशानी आती है या वह बंद हो जाता है, तो दूसरे विकल्प उपलब्ध होने चाहिए, ताकि आम लोगों की जरूरतें प्रभावित न हों। उन्होंने बताया कि इस दिशा में काम पहले से चल रहा है। भारत के लिए यह मुद्दा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि देश की ऊर्जा जरूरत लगातार बढ़ रही है और अतिरिक्त ऊर्जा जरूरत के मामले में भारत दुनिया में सबसे आगे है।
घरेलू तेल उत्पादन बढ़ाने के लिए ओएनजीसी क्या कर रही है?
ओएनजीसी घरेलू स्तर पर तेल और गैस का उत्पादन बढ़ाने के लिए कम खोजे गए और नए क्षेत्रों पर ध्यान बढ़ा रही है। इसमें गहरे समुद्र वाले क्षेत्र भी शामिल हैं। सिन्हा ने बताया कि घरेलू उत्पादन बढ़ाना भी विदेशी स्रोतों पर निर्भरता कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। ई20 के जरिए पेट्रोल में इथेनॉल की हिस्सेदारी बढ़ाने और देश में तेल-गैस का उत्पादन बढ़ाने की कोशिशें एक साथ भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत कर सकती हैं। उनका कहना है कि बदलते वैश्विक हालात में देश के पास ऊर्जा के कई विकल्प होना जरूरी है।
इंडिया एनर्जी वीक 2027 में किन मुद्दों पर होगी चर्चा?
इंडिया एनर्जी वीक 2027 का आयोजन 28 से 31 जनवरी तक कोलकाता के न्यू टाउन कन्वेंशन सेंटर में होगा। इसका आयोजन पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के संरक्षण में फेडरेशन ऑफ इंडियन पेट्रोलियम इंडस्ट्री की ओर से किया जा रहा है। इसमें 75 हजार से ज्यादा ऊर्जा क्षेत्र के पेशेवर और 700 से अधिक अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शकों के शामिल होने की उम्मीद है। कार्यक्रम में ऊर्जा सुरक्षा, सस्ती ऊर्जा, टिकाऊ ऊर्जा, कार्बन उत्सर्जन में कमी और नई तकनीक जैसे मुद्दों पर चर्चा होगी। इसके अलावा नवीकरणीय ऊर्जा, हाइड्रोजन, जैव ईंधन, एलएनजी, सिटी गैस वितरण, पेट्रोकेमिकल, डिजिटल तकनीक और एआई, मेक इन इंडिया तथा नेट-जीरो समाधान जैसे क्षेत्रों पर भी ध्यान दिया जाएगा। अहमदाबाद का कार्यक्रम कोलकाता में आयोजित मुख्य कर्टेन रेजर समारोह से ऑनलाइन जुड़ा था।