सीआरपीएफ के इतिहास में यह पहली बार हो रहा है कि युवा अफसर परेड ग्राउंड में सलामी दिए बिना ट्रेनिंग अकादमी से बाहर निकलेंगे। कोरोना वायरस के संक्रमण की वजह से सीआरपीएफ के 42 युवा अफसर, जिनकी प्रशिक्षण अवधि मार्च में खत्म हो गई थी, अब 24 अप्रैल को सीआरपीएफ ट्रेनिंग अकादमी कादरपुर, में ई-पासिंग आउट परेड के जरिए 'सहायक कमांडेंट' पद की शपथ लेंगे।
साथ ही बल की वह गरिमापूर्ण रस्म, जिसे अंतिम पग यानी ‘पीलिंग ऑफ’ कहा जाता है, वह भी ऑडिटोरियम की सीढ़ियों पर ही पूरी की जाएगी। केंद्रीय गृह राज्यमंत्री जी किशन रेड्डी अपने दफ्तर में बैठकर ऑन लाइन मुख्य अतिथि की औपचारिकताएं निभाएंगे।
साथ ही बल के डीजी डॉ. एपी महेश्वरी दिल्ली के सीजीओ कांप्लेक्स स्थित सीआरपीएफ मुख्यालय से ई-पासिंग आउट परेड में युवा अफसरों को संबोधित करेंगे।
सीआरपीएफ के 42 युवा अफसरों में चार महिलाएं भी हैं। बल के डीआईजी 'इंटेलीजेंस' एम. दिनाकरण के अनुसार, इन सभी युवा अफसरों की ट्रेनिंग मार्च में पूरी हो गई थी। कोरोना संक्रमण की वजह से इनकी पासिंग आउट परेड भी टलती चली गई।
लॉकडाउन 1.0 के बाद लॉकडाउन 2.0 लागू हो गया। इसके चलते यह निर्णय लिया गया कि युवा अफसरों को ई-पासिंग आउट परेड के जरिए पद की शपथ दिला दी जाए। ट्रेनिंग अकादमी स्थित ऑडिटोरियम में ई-पीओपी की औपचारिकता पूरी की जाएगी।
पहले इस तरह की परेड में काफी भीड़ रहती थी। बल के मौजूदा अफसरों के अलावा युवा अफसरों के परिजन भी पासिंग आउट परेड के साक्षी बनते थे। उनके सामने मुख्य अतिथि को सलामी दी जाती थी। बाद में मंच की दोनों साइड से ये अधिकारी बाहर निकलते थे।
उससे पहले इन्हें एक प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है, जिसे अंतिम पग कहा जाता है। यह प्रक्रिया देश के आजाद होने के पहले से ही चली आ रही है। जब कोई अफसर अंतिम पग से होते हुए बाहर निकलता है, तो ही उसकी ट्रेनिंग पूरी मानी जाती है।
अब पहली बाहर हो रही ई-पासिंग आउट परेड में ये सभी रस्म ऑडिटोरियम में ही पूरी की जाएंगी।