फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

लॉकडाउन के दौरान बुजुर्गों में कम नींद और याददाश्त कमजोर होने का खतरा

Fri, 15 May 2020 12:04 PM IST
Tanuja Yadav न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

  • अध्ययन के मुताबिक बुजुर्गों और बच्चों पर लॉकडाउन का गहरा असर
  • बुजुर्गों में नींद कम आने और याददाश्त कमजोर होने का खतरा
  • एम्स जेरियाट्रिक विभाग के डॉ.प्रसून चटर्जी और कर्नाटक के डॉ. संतोष के वाई की रिपोर्ट
विज्ञापन
old people - फोटो : pexels.com
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

कोरोना के संक्रमण को काबू करने के लिए देश में 50 दिन से लॉकडाउन लगा है और इसे आगे भी बढ़ाने के संकेत दिए गए हैं। इस बीच बुजुर्गों और बच्चों को लॉकडाउन में रहने की हिदायत दी गई है लेकिन ऐसे कब तक घर में बंद रहा जा सकता है ये कह पाना मुश्किल है।

विज्ञापन


एक अध्ययन में चौकाने वाली बात सामने आई है। अध्ययन के मुताबिक अगर लॉकडाउन आगे ऐसा ही रहा तो बुजुर्गों और बच्चों की परेशानी बढ़ने वाली है। अध्ययन में सलाह दी गई है कि बुजुर्गों और बच्चों को इस परेशानी से दूर करने के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म पर साथ लाना जरूरी है। 

ये शोध जर्नल ऑफ अमेरिकन जेरियाट्रिक सोसायटी में प्रकाशित हुआ है। इसमें कई शोधों का हवाला देते हुए कहा गया है कि अगर देश के बुजुर्गों और बच्चों पर ध्यान नहीं दिया गया तो आने वाले समय में दोनों के स्वास्थ्य पर गहरा असर पड़ सकता है। लंबे समय के लिए लगे लॉकडाउन से बच्चों में चिड़चिड़ापन बढ़ सकता है। 
विज्ञापन


बुजुर्गों की याददाश्त पर गहरा असर पड़ेगा, नींद कम आने की वजह से उनके कार्डियोवैस्कुलर सिस्टम और दिमाग पर भी असर पड़ सकता है। अध्ययन में कहा गया है कि बुजुर्गों और बच्चों को फोन या वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए दूसरे लोगों से अवगत कराना होगा। एम्स जेरियाट्रिक विभाग के डॉ.प्रसून चटर्जी और कर्नाटक के डॉ. संतोष के वाई ने यह रिपोर्ट तैयार की है। 

नीति आयोग की गाइडलाइन
देश में 60 साल या इससे ज्यादा उम्र के 16 करोड़ लोगों के लिए नीति आयोग ने विशेष गाइडलाइन्स बनाई हैं। हैदराबाद में कंसल्टेंट साइकोलॉजिस्ट डॉ. प्रज्ञा रश्मि का कहना है कि इस समय बुजुर्गों में डिप्रेशन के मामले 18 से 24 फीसद तक बढ़े हैं। 

जो बुजुर्ग अकेले या परिवार के साथ रहते हैं, उन्हें कोरोना के बारे में समझाने के साथ साथ सोशल डिस्टेंसिंग, मास्क पहनने और हाथ धोने के महत्व को बताने की जरूरत है। 

डॉ. रश्मि के मुताबिक कई बुजुर्गों के लिए सोशल डिस्टेंसिंग नया शब्द है इसलिए उन्हें बताएं कि किसी को छूने या करीब जाने से बचना जरूरी है। यदि आप माता-पिता से दूर रह रहे हैं, और वे अकेले हैं, तो उनसे बात करें। रोजाना उनसे बात करेंगे तो इससे उनका अकेलापन दूर होगा और उन्हें राहत मिलेगी।

विज्ञापन
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें