प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कोविड-19 से जंग में लगातार देश का नेतृत्व कर रहे हैं। राष्ट्रीय,अंतरराष्ट्रीय, क्षेत्रीय नेताओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं सभी क्षेत्रों के लोगों से लगातार संवाद कर रहे हैं। शनिवार को उन्होंने इसी क्रम में देश के सभी मुख्यमंत्रियों के जरिए वीडियो कांफ्रेसिंग के जरिए चर्चा की।
प्रधानमंत्री का वक्तव्य समाप्त होने के बाद सबसे पहले महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने अपनी बात रखी। सूत्र बताते हैं कि उद्धव के बाद पंजाब, राजस्थान, छत्तीसगढ़, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री ने भी अपनी राय रखी।
राजस्थान के मुख्यमंत्री समेत कई मुख्यमंत्रियों ने राय रखी कि उनके राज्य की अपने दम पर संक्रमण रोक पाने की क्षमता नहीं है। राज्य में बिजनेस गतिविधियां बंद हैं, फैक्टियां, उद्योग धंधे बंद हैं। पंजाब में दूसरे राज्यों के मजदूरों की भारी तादात है और उन्हें खाना, राशन बांटना आदि बड़ी समस्या है।
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री ने भी दूसरे राज्यों के मजदूरों, संगठित, असंगठित क्षेत्र के लेबर का मुद्दा उठाया। दिल्ली ने भी अपनी मजबूरी बताई। झारखंड और छत्तीसगढ़ ने केंद्र सरकार से पीएसयू के पास माइनिंग की पड़ी रायल्टी रिलीज कराने का आग्रह किया।
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कोविड-19 से लड़ने में सरकार का पक्ष रखा। उन्होंने भी केंद्रीय सहायता की मांग की। ममता बनर्जी ने कहा कि देश इस समय गंभीर स्थिति से गुजर रहा है, लेकिन कुछ मुख्यमंत्री या राज्यपाल, उपराज्यपाल राजनीति करने से बाज नहीं आ रहे हैं।
वे सरकार के कामकाज में दखल दे रहे हैं। मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री से आग्रह किया कि इस तरह राजनीतिक दखल बंद कराया जाना चाहिए। झारखंड के मुख्यमंत्री, छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भी अपने प्रयासों और राज्य की समस्याओं के लेकर वीडियो कांफ्रेसिंग में हिस्सा ले रहे थे।
कर्नाटक के मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा ने कोविड-19 से लडऩे के केन्द्र सरकार के प्रयासों की सराहना की और कई अपने राज्य के प्रयास को भी बताया। कई सीएम को उम्मीद थी कि उन्हें भी अपनी बात रखने का अवसर मिलेगा लेकिन मौका मिल नहीं पाया।