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कश्मीर में सुरक्षा बलों पर पत्थर बरसाने वाले हाफिज सईद के गुर्गों पर कसा शिकंजा

Thu, 01 Aug 2019 08:20 PM IST
अमर शर्मा डिजिटल ब्यूरो अमर उजाला, नई दिल्ली
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कश्मीर में पत्थरबाजी (फाइल)
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जम्मू-कश्मीर में आपने देखा होगा कि जब आतंकियों और सुरक्षा बलों के बीच मुठभेड़ होती है तो एकाएक भीड़ के बीच से जवानों पर पत्थर बरसने लगते हैं। भारतीय जांच एजेंसियों ने अब इसका पता लगा लिया है कि स्थानीय युवकों को जेहाद के नाम पर कुछ पैसे देकर उनसे पत्थर फिंकवाने का काम कौन कर रहा है। इसके लिए पैसा कहां से आ रहा है। घाटी में पाकिस्तानी आतंकियों के गुर्गे कौन हैं, अब इन सब रहस्यों से पर्दा उठ गया है। आतंकियों से मुठभेड़ के दौरान सुरक्षा बलों पर पत्थर बरसाने वाला कोई और नहीं, बल्कि पाकिस्तानी आतंकवादी हाफिज सईद के गुर्गे हैं। एनआईए और ईडी ने अब सईद के गुर्गों पर शिकंजा कस दिया है। ईडी की जांच में सामने आया है कि कश्मीर में मौजूद सईद के लोगों को पाकिस्तान से आर्थिक मदद मिल रही है।
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प्रवर्तन निदेशालय ने गुरुवार को पाकिस्तानी आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा और जमात-उद-दावा के संस्थापक हाफिज मुहम्मद सईद के गुर्गे जहूर अहमद शाह वटाली एवं उनके परिवार के सदस्यों की 1.73 करोड़ रुपये की अचल संपत्ति जब्त कर ली है। इसमें नई दिल्ली के जम्मू-कश्मीर बैंक की शाखा में जहूर अहमद शाह वटाली के बैंक खाते में जमा 25 लाख रुपये भी शामिल हैं। इस संपत्ति को धन शोधन रोकथाम अधिनियम (पीएमएलए) 2002 के प्रावधानों के तहत जब्त किया गया है। ईडी ने एनआईए की जांच के आधार पर जब इस मामले की परतें खोली तो हैरान करने वाले खुलासे हुए। हाफिज मुहम्मद सईद, यूसुफ शाह उर्फ सलाउद्दीन, आफताब अहमद शाह उर्फ शाहिद-उल-इस्लाम, अल्ताफ अहमद शाह उर्फ फंटूश, नईम अहमद खान, फारूक अहमद डार उर्फ बिट्टा कराटे, मोहम्मद अकबर खांडे, राजा महराजुद्दीन कलवाल, बशीर अहमद भट उर्फ पीट सैफुल्लाह, ज़हूर शाह वटाली, कामरान यूसुफ और जावेद अहमद भट के खिलाफ आईपीसी की धारा 120 बी, 121 और 121 ए, 1860 धारा 13, 16, 17, 18, 20, 38, 39 और 40 गैर कानूनी गतिविधियों (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए), 1967 के साथ मामला दर्ज किया गया था। आरोपी जहूर अहमद शाह वटाली से हुई पूछताछ में सामने आया है कि वह पाकिस्तानी आतंकी हाफिज मुहम्मद सईद के लिए काम करता है। उसके इशारे पर फंड जुटाया जाता है। इसी फंड में से हुर्रियत नेताओं को वित्तीय सहायता दी जाती है।

हाफिज का इशारा होते ही भारत विरोधी प्रदर्शन और पत्थराव होते हैं

एनआईए की जांच में यह भी पता चला है कि ऑल पार्टी हुर्रियत कांफ्रेंस (एपीएचसी) और अन्य अलगाववादी संगठन आम जनता, विशेषकर युवाओं को, भारतीय सुरक्षा बलों के खिलाफ भड़काते हैं। सोशल मीडिया पर सैन्य बलों के खिलाफ दुष्प्रचार किया जाता है। हाफिज मुहम्मद सईद का इशारा मिलते ही भारत विरोधी प्रदर्शन और सुरक्षा बलों पर पत्थराव होने लगता है। झूठी बातें फैलाकर सुरक्षा बलों के खिलाफ कश्मीरी लोगों, विशेषकर युवाओं को उकसाया जाता है। आतंकियों से मुठभेड़ के दौरान सुरक्षा बलों पर पथराव कराने का काम भी यही लोग करते हैं। इनका मकसद होता है कि भारत सरकार के प्रति जम्मू-कश्मीर के लोगों में ज्यादा से ज्यादा नफरत और असहमति पैदा की जाए। 

पीएमएलए के तहत हुई जांच से पता चला है कि हुर्रियत नेताओं को पाकिस्तान से धन प्राप्त होता रहा है। गुलाम मोहम्मद के घर से जब्त किए गए दस्तावेज से पता चला है कि इस धन में कुछ राशि तो पाकिस्तान उच्चायोग से प्राप्त होती रही है। यहां बता दें कि भट्ट ने लंबे समय तक जहूर अहमद शाह वटाली के साथ खजांची के रूप में काम किया है। यह दस्तावेज़ बताता है कि ज़हूर अहमद शाह वटाली को सईद के संगठन जमात-उद-दावा, आईएसआई और नई दिल्ली में पाकिस्तान के उच्चायोग से आर्थिक मदद मिली है। इसके अलावा दुबई से भी घाटी में पैसा पहुंच रहा है। जहूर अहमद शाह वटाली यही पैसा जम्मू-कश्मीर के हुर्रियत नेताओं, अलगाववादियों और पथराव करने वालों को भेज रहे थे। 

अब आतंकियों को मदद कर रहे सरकार कर्मचारियों की बारी

जम्मू-कश्मीर में आतंकियों को धन, तकनीकी संसाधन और दूसरी तरह की मदद कौन दे रहा है, जांच एजेंसियां अब ऐसे लोगों के ठिकानों तक पहुंचने लगी हैं। पता चला है कि आतंकियों को मदद करने वालों में केवल अलगाववादी या पाकिस्तानी आतंकियों के गुर्गें ही नहीं, बल्कि जम्मू-कश्मीर के सरकारी कर्मचारी भी शामिल हैं। एनआईए, आयकर विभाग और ईडी ने कई ऐसे कर्मियों और सामाजिक संगठनों का पता लगाया है, जिनके यहां से गैर-कानूनी लेन देन हुआ है। एनआईए द्वारा अलगाववादी नेता शब्बीर शाह, आशिया अंदराबी और मशरत आलम भट्ट का पहले ही पर्दाफाश किया जा चुका है। पाकिस्तान के आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा और जमात-उद-दावा को कश्मीर में आतंकी गतिविधियों के लिए वित्तीय मदद देने वाले अब बच नहीं सकेंगे। एनआईए और ईडी को पूछताछ में कई दूसरी अहम जानकारियां मिली हैं। आने वाले दिनों में घाटी के कई हिस्सों में बड़े पैमाने पर इन एजेंसी की छापेमारी देखने को मिलेगी। 
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