आरबीआई की रिपोर्ट के अनुसार, इसके साथ की नकदी से जुड़ी धोखाधड़ी भी ज्यादा हो रही है। आरबीआई के आंकड़ों से पता चलता है कि धोखाधड़ी में सरकारी बैंकों की हिस्सेदारी 2021-22 में 66.7 फीसदी थी।
इस साल अप्रैल-सिंतबर के दौरान भारतीय बैंकों में धोखाधड़ी के मामलों में 46 फीसदी की गिरावट आई है। इस दौरान 19,845 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी हुई है। जबकि 2021 में इसी अवधि में यह आंकड़ा 36,316 करोड़ रुपये था। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की ओर से मंगलवार को जारी रिपोर्ट में कहा गया है कि 2019-20 के पहले कर्ज देने के मामले में ज्यादा धोखाधड़ी आ रही थी। हालांकि, अब यह कार्ड या इंटरनेट आधारित ज्यादा हो गया है।
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आरबीआई की रिपोर्ट के अनुसार, इसके साथ की नकदी से जुड़ी धोखाधड़ी भी ज्यादा हो रही है। आरबीआई के आंकड़ों से पता चलता है कि धोखाधड़ी में सरकारी बैंकों की हिस्सेदारी 2021-22 में 66.7 फीसदी थी। पिछले वर्ष यह 59.4 फीसदी थी। आरबीआई ने यह भी बताया कि निजी क्षेत्र के बैंकों में शीर्ष अधिकारियों-कर्मचारी मुआवजा औसत से 78 गुना बढ़ा हुआ है। सरकारी बैंकों में यह लगभग 3 गुना है।
केंद्रीय बैंक ने कहा, मार्च 2021 के अंत में निजी बैंकों के सीईओ ने कर्मचारियों की तुलना में 73 गुना ज्यादा वेतन लिया। छोटे वित्त बैंकों में सीईओ ने औसत कर्मचारी का 76 गुना वेतन लिया।। जबकि सरकारी बैंकों के सीईओ का औसत केवल 2.2 गुना ही रहा।