बंगाल की धरती पर जिस तरह दुर्गा पूजा का महत्व रहा है, उसी तरह महालया को भी बहुत धूमधाम से मनाया जाता है। बंगाल में महालया का हर कोई इंतजार करता है क्योंकि यहां पुत्री के रूप में मां भवानी को बुलाया जाता है।
कल यानि रविवार को महालया है और बंगाल में सहित पूर्वोत्तर भारत में महालया का खास महत्व है। बंगाल में दुर्गापूजा की तैयारियां अंतिम चरण में हैं। कोलकाता के विभिन्न पूजा पंडाल थीम आधारित पंडाल बना रहे हैं। महालया के बाद से 10 दिवसीय दुर्गा पूजा की शुरुआत औपचारिक रूप से हो जाएगी। दक्षिण कोलकाता का प्रसिद्ध पूजा पंडाल पूजा चेतला अग्रणी थीम आधारित पूजा के लिए प्रसिद्ध है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी रविवार को महालया के दिन इस पूजा पंडाल में मां दुर्गा का चक्षु दान करेंगी। इस अवसर पर मंत्री बाबुल सुप्रियो और फिरहाद हकीम भी उपस्थित रहेंगे।
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बंगाल की धरती पर जिस तरह दुर्गा पूजा का महत्व रहा है, उसी तरह महालया को भी बहुत धूमधाम से मनाया जाता है। बंगाल में महालया का हर कोई इंतजार करता है क्योंकि यहां पुत्री के रूप में मां भवानी को बुलाया जाता है। इस दिन देवी दुर्गा की प्रतिमा पर रंग चढ़ाया जाता है, उनकी आंखें बनाई जाती हैं और प्रतिमा समेत मंडप को सजाया जाता है। मां दुर्गा की मूर्ति बनाने वाले कारीगर अपना कार्य पहले ही शुरू कर लेते हैं, लेकिन महालया के दिन मूर्ति को अंतिम रूप देते हैं। महालया के दिन पितृपक्ष समाप्त होते हैं और इसी दिन से देवी पक्ष की शुरुआत हो जाती है।
पितृपक्ष की तरह ही देवी पक्ष भी 15 दिन का होता है, जिसमें से 10 दिन नवरात्रि के होते हैं और 15वें दिन लक्ष्मी पूजा के साथ देवी पक्ष समाप्त हो जाता है अर्थात शरद पूर्णिमा के साथा देवी पक्ष समाप्त होता है। बता दें कि यूनेस्को ने कोलकाता की दुर्गापूजा को सांस्कृतिक विरासत घोषित किया है। इस कारण इस साल दुर्गापूजा को भव्य तरीके से मनाया जा रहा है।