देश में चल रहे लॉकडाउन ने कई क्षेत्रों को प्रभावित किया है। इसका असर अब तमिलनाडु के मंदिरों पर भी देखने को मिल रहा है, उन्हें भी करोड़ों रुपए के राजस्व का नुकसान हो रहा है।
दरअसल तमिलनाडु सरकार ने कोरोना वायरस के प्रसार को रोकने के लिए लॉकडाउन लागू कर दिया, जिसके बाद मंदिरों के दरवाजे 24 मार्च से जनता के लिए बंद कर दिए गए हैं। ऐसे में अब मंदिरों के पास राजस्व बढ़ाने के लिए कोई अन्य साधन नहीं है।
वर्तमान राजकोषीय स्थिति के बावजूद, कुछ प्रमुख मंदिर जो हमेशा कम आय वाले मंदिरों की जरूरतों को पूरा करते आए हैं, उन्हें इस महामारी के दौर में अन्य मंदिरों के प्रबंधन के लिए भी अतिरिक्त राशि का बोझ उठाना पड़ सकता है।
हिंदू धार्मिक और धर्मार्थ बंदोबस्त (एचआर एंड सीई) विभाग के एक अधिकारी ने कहा, औसतन, करीब 150 मंदिर ऐसे है जिन्हें राजस्व के संदर्भ में प्रमुख तौर पर गिना जाता है। लॉकडाउन के दौरान इन सबके राजस्व में पूरी तरह से गिरावट दर्ज की गई है।
HR और CE तमिलनाडु में 36,612 मंदिरों का प्रबंधन करते हैं। ये संपन्न मंदिर अपने अधिशेष कोष से संरक्षण/ नवीकरण/बहाली करते हैं।
अधिकारियों की तरफ से बताया गया है कि राजस्व हानि का एक सटीक आकलन केवल लॉकडाउन के खत्म होने और सामान्य स्थिति में आने के बाद ही किया जा सकता है। शुरुआती अनुमानों से पता चलता है कि उन प्रमुख मंदिरों में से प्रत्येक में लॉकडाउन के दौरान केवल नकद दान से ही 40 लाख से एक करोड़ रुपये तक का नुकसान हुआ है।
उदाहरण के लिए डिंडीगुल जिले के पलानी में प्राचीन श्री धांधायुथापानी स्वामी मंदिर में पंचामृतम् (प्रसाद), रस्सा कार और चरखी की बिक्री से मिलने वाली आय के बराबर लगभग एक करोड़ रुपये की नकद राशि मिलती है।
शहर में सभी श्री पार्थसारथी स्वामी मंदिर, श्री कपलेश्वर मंदिर और वाडापलानी अंदावर मंदिर, मदुरै में प्रसिद्ध श्री मीनाक्षी अम्मन मंदिर और कन्याकुमारी में श्री भागवती अम्मन मंदिर प्रमुख राजस्व कमाई वाले मंदिरों में से एक हैं।