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महाराष्ट्र के सियासी संकट ने बिगाड़ा दिल्ली भाजपा के 'नाश्ते' का स्वाद, जानिये क्या है वजह

Tue, 12 Nov 2019 06:46 PM IST
Harendra Chaudhary अमित शर्मा, अमर उजाला, नई दिल्ली
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प्रकाश जावड़ेकर - फोटो : File Photo
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महाराष्ट्र में सियासी संकट अपने चरम पर है। राज्य में राष्ट्रपति शासन की सिफारिश हो चुकी है और इसी बीच शिवसेना सुप्रीम कोर्ट पहुंच गई है। महाराष्ट्र के सियासी संकट के कारण दिल्ली भाजपा के नेताओं के नाश्ते का स्वाद बिगड़ गया है। भाजपा नेता और केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर चुनाव परिणाम आने के दिन यानी 24 अक्टूबर से ही ज्यादातर समय महाराष्ट्र में बिता रहे हैं।

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उन्हें महाराष्ट्र के सियासी संकट में से पार्टी की दृष्टि से उचित समाधान तलाशने की जिम्मेदारी दी गई है। लेकिन पार्टी की उम्मीदों के विपरीत यह मामला ज्यादा लंबा खिंच गया है और मामला पार्टी की पकड़ से दूर जाता दिख रहा है। फिलहाल जावड़ेकर की इस नई व्यस्तता के कारण दिल्ली भाजपा का कामकाज प्रभावित हो रहा है जहां उसकी बड़ी साख दांव पर है।  

क्या है नाश्ते का राज?

दरअसल, भाजपा ने प्रकाश जावड़ेकर को दिल्ली विधानसभा के चुनाव का विशेष प्रभार दे रखा है। दिल्ली में पार्टी की स्थिति को बेहतर बनाने के लिए जावड़ेकर रोजाना दिल्ली के शीर्ष भाजपा नेताओं के साथ नाश्ते पर बैठक करते हैं। इस बैठक में प्रकाश जावड़ेकर के अलावा प्रदेश अध्यक्ष मनोज तिवारी, संगठन मंत्री सिद्धार्थन, प्रदेश प्रभारी श्याम जाजू, विजय गोयल, नेता प्रतिपक्ष विजेंद्र गुप्ता और केंद्रीय स्वास्थ्यमंत्री डॉ. हर्षवर्धन हिस्सा लेते हैं। इन नेताओं के अलावा विशेष अवसरों पर आमंत्रित अतिथि नेता भी इस बैठक में दिल्ली में पार्टी को मजबूत बनाने की  रणनीति पर मंथन करते हैं।

चुनाव के बाद नहीं हुई बैठक

भाजपा के एक नेता के मुताबिक महाराष्ट्र के सियासी पेंच में उलझने के बाद प्रकाश जावड़ेकर दिल्ली के लिए समय नहीं दे पा रहे हैं। केंद्रीय मंत्री होने के नाते उनकी अन्य व्यस्तताएं भी रहती हैं। महाराष्ट्र का मामला उलझने के बाद से यानी लगभग 20 दिनों से यह बैठक नहीं हुई है, और इस व्यस्तता के चलते दिल्ली का कामकाज प्रभावित हो रहा है।

पार्टी की साख दांव पर

दरअसल, दिल्ली का चुनाव भाजपा के लिए काफी हद तक प्रतिष्ठा का प्रश्न बन सकता है। इसका कारण यह है कि 2014 के लोकसभा चुनाव के बाद पार्टी का विजयी रथ दिल्ली में आकर ठहर गया था, जबकि लोकसभा चुनाव में उसने दिल्ली की सातों सीटों पर जबरदस्त जीत हासिल की थी। वह दिल्ली की तीनों नगर निगमों पर भी काबिज थी। लेकिन इसके बाद भी वह दिल्ली में जीत हासिल करने में नाकाम रही थी। 

 

अब जबकि 2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने दिल्ली की सातों लोकसभा सीटों पर दोबारा जीत हासिल करने में कामयाब रही है, वह दिल्ली के तीनों नगर निगमों पर काबिज है, दिल्ली का चुनाव एक बार फिर उसके सामने है। उसके सामने दिल्ली में जीत हासिल करने की कड़ी चुनौती है।  

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