मजदूरी में प्रति एकड़ खर्च बढ़ा
इधर महंगाई के कारण मजदूरी में भी बढ़ोतरी हुई है। अब गन्ने के एक एकड़ का मजदूरी खर्च 900 रुपये से बढ़कर 1500 रुपये प्रति एकड़ तक बढ़ चुका है। गन्ना की छिलाई 25 रुपये से बढ़कर 30-35 रुपये प्रति क्विंटल और पेराई भी बढ़ चुकी है।
यूरिया की कीमत तो 270 रुपये प्रति बोरी पर सीमित रही है, लेकिन महंगाई के कारण कंपनियों ने 50 किलो की बोरी का वजन घटाकर 45 किलो तक कर दिया है। इस तरह अप्रत्यक्ष तरीके से यूरिया की कीमत में भी बढ़ोतरी हुई है। डाई की कीमत 900 से बढ़कर 1400 रुपये और कीटनाशकों के मूल्य में भी भारी बढ़ोतरी हुई है।
गन्ना किसानों को प्रति क्विंटल 316 ररुपये खेत में तो गन्ना मिल तक ले जाने के बाद 324 रुपये प्रति क्विंटल का भुगतान मिल रहा है। इसमें पिछले चार साल से कोई बढ़ोतरी नहीं हुई है। जबकि इसी बीच सिंचाई, बिजली, डीजल के कारण परिवहन की लागत में भारी बढ़ोतरी हुई है। दुर्भाग्य यह है कि किसानों को यह मूल्य भी समय से नहीं मिल पाता। इसके लिए भी उसे कई-कई साल तक इंतजार करना पड़ जाता है। इससे किसानों में भारी नाराजगी है।
उत्पादन में भी बढ़ोतरी
हालांकि, इन नकारात्मक खबरों के बीच गन्ने के उत्पादन में वृद्धि से किसानों की लागत मूल्य कुछ कम हुई है। अब गन्ने की पैदावार प्रति एकड़ 250 क्विंटल से बढ़कर 350 क्विंटल तक पहुंच गई है। इससे किसानों को कुछ राहत मिली है। लेकिन अगर इसके साथ सरकार की कुछ मदद मिल जाती तो किसानों की जिंदगी खुशहाल हो सकती है।
गन्ना उत्पादन में भारत
वैश्विक स्तर पर गन्ना उत्पादन में भारत का स्थान ब्राजील के बाद दूसरे नंबर पर है। 2018-19 में गन्ने का उत्पादन 40.02 करोड़ टन रहा। कुल बुवाई क्षेत्रफल के 2.8 फीसदी में गन्ने का उत्पादन किया जाता है। देश में कुल 746 चीनी मिलें (सहकारी क्षेत्र में 324, सार्वजनिक क्षेत्र में 44 और निजी क्षेत्र में 378 चीनी मिलें) हैं। इनमें सार्वजनिक क्षेत्र की 77.3 प्रतिशत, सहकारी क्षेत्र की 31.8 फीसदी और निजी क्षेत्र की 21.2 फीसदी चीनी मिलें विभिन्न कारणों से बंद पड़ी हैं।