एक जनवरी से एक मार्च 2021 के बीच पेट्रोल, डीजल और गैस की कीमतों में बेतहाशा वृद्धि हुई है। इसके कारण सब्जियों, फलों, दालों और अनाजों के दामों में भी बीस से तीस फीसदी तक की बढ़ोतरी हुई है। इसका असर सीधे आम आदमी के घर के बजट पर पड़ रहा है। अनुमान है कि इन बढ़ती कीमतों से दिल्ली में रहने वाले एक सामान्य परिवार पर प्रति महीने 1200 से 1500 रुपये का अतिरिक्त भार बढ़ा है। वहीं मध्यम आय वर्ग के लोगों पर भी तीन से 3500 हजार रुपये प्रति महीने तक का भार बढ़ा है।
पेट्रोल की बढ़ती कीमतों का असर सब्जियों और अनाजों के दामों पर भी पड़ने लगा है। डीजल कीमतों में बढ़ोतरी से ट्रक माल भाड़े में 15 से 20 फीसदी तक की बढ़ोतरी हुई है। इससे महाराष्ट्र, पुणे, नागपुर, नासिक की मंडियों से आने वाली प्याज तीस रुपये प्रति किलो से बढ़कर 60 रुपये प्रति किलो तक पहुंच चुकी है। बाकी सब्जियों में भी 20 से 30 फीसदी तक की बढ़ोतरी हुई है। मसूर दाल की कीमतों में 10 से 20 फीसदी तो तूर दाल की कीमतों में 20 फीसदी तक की बढ़ोतरी हुई है। सबसे ज्यादा असर खाद्य तेलों पर पड़ रहा है जिनकी कीमतों में 30 से 60 फीसदी तक की बढ़ोतरी हुई है। सब्जियों-दालों की बढ़ी कीमतों के कारण प्रति परिवार पर औसतन 500 रुपये प्रति माह तक का अतिरिक्त भार पड़ रहा है।
एक जनवरी 2021 को दिल्ली में 14.2 किलो वाले नॉन-सब्सिडाइज्ड गैस सिलिंडर की कीमत 694 रुपये थी, जो आज बढ़कर 819 रुपये हो चुकी है। पति-पत्नी और दो बच्चों वाले एक औसत परिवार में प्रति महीने एक सिलंडर की खपत होती है। इस प्रकार गैस की बढ़ी कीमतों के कारण प्रत्येक परिवार पर 125 रुपये तक की मार पड़ी है।
गैस पर प्रति माह 125 रुपये, सब्जियों-दालों पर 500-550 रुपये और पेट्रोल पर लगभग 500 रुपये का अतिरिक्त खर्च पड़ रहा है। यह लगभग 1200 रुपये प्रति माह बैठता है। थोड़ा अतिरिक्त खर्च वाले परिवार में यह खर्च 1500 रुपये अतिरिक्त तक पड़ रहा है। वहीं, कार से चलने वाले एक मध्यम वर्गीय परिवार पर प्रति महीने तीन से 3500 रुपये अतिरिक्त का खर्च पड़ रहा है।
पेशे से एक शिक्षक गीता श्रीवास्तव का कहना है कि कोरोना काल में पति की नौकरी छूट गई थी। लगभग डेढ़ महीने पहले उनके पति को एक प्राइवेट कंपनी में काम मिला है। लेकिन अभी भी घर का बजट बिगड़ा हुआ है। इस महंगाई के कारण उनके घर की हालत खराब हो गई है। परिवार चलाना मुश्किल हो रहा है।