दार्जिलिंग पर्वतीय क्षेत्र में बीते दो महीने से अलग राज्य की मांग में जारी आंदोलन की वजह से दार्जिलिंग हिमालयन रेलवे (डीएचआर) को लगभग ढाई करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। रेलवे के एक वरिष्ठ अधिकारी ने सोमवार को इसकी जानकारी दी।
पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी प्रणव ज्योति शर्मा ने बताया कि अगर हालात सामान्य होते तो टॉय ट्रेन के संचालन से अब तक ढाई करोड़ की आमदनी हुई होती। इलाके में टॉय ट्रेन सेवा बीते 12 जून से ही स्थगित है। उन्होंने कहा कि इस हेरिटेज ट्रेन का संचालन पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे के तहत किया जाता है।
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यूनेस्को ने सिलीगुड़ी से दार्जिलिंग के बीच चलने वाले इस ट्रेन को दो दिसंबर, 1999 को हेरिटेज दर्जा दिया था। शर्मा ने बताया कि गोरखालैंड आंदोलन के दौरान इस ट्रेन के सोनादा व गयाबाड़ी स्टेशनों को आग लगा दी गई, जिससे गयाबाड़ी स्टेशन जल कर राख हो चुका है। आंदोलन से पहले दार्जिलिंग से घूम के बीच रोजाना नौ ट्रेनें चलती थीं।
इसके अलावा सिलीगुड़ी से दार्जिलिंग और दार्जिलिंग से सिलीगुड़ी के बीच एक-एक ट्रेन चलाई जाती थी। लेकिन 12 जून से ही तमाम ट्रेनों का संचालन ठप है। उन्होंने कहा कि रेलवे को अब पर्वतीय क्षेत्र में हालत सामान्य होने का इंतजार है। 12 जून के बाद जिन यात्रियों ने उक्त ट्रेनों की बुकिंग कराई थी उनका आरक्षण रद्द कर पैसे लौटाए जा चुके हैं।