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Drone Menace: पाकिस्तान से हथियार-नशीले पदार्थों की तस्करी पर लगेगी रोक, ड्रोन रोधी तकनीक पर फोकस; जानें सबकुछ

Tue, 02 Jan 2024 05:56 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Drone Menace: सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि ड्रोन के जरिए सीमा पार से हथियारों और मादक पदार्थों की तस्करी का खतरा अगले छह महीनों में खत्म हो जाएगा। तब तक ड्रोन-रोधी तकनीक लगा दी जाएगी। नई प्रौद्योगिकी पर परीक्षण चल रहे हैं
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ड्रोन - फोटो : सोशल मीडिया।
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विस्तार
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सीमा पार से भारतीय क्षेत्र में हथियारों और नशीले पदार्थों की तस्करी के लिए ड्रोन का इस्तेमाल अगले छह महीनों में खत्म हो जाएगा। दरअसल, राष्ट्र विरोधी तत्वों द्वारा इस तरह के सभी दुस्साहसों को रोकने के लिए एक स्वदेशी ड्रोन रोधी तकनीक विकसित की जा रही है। सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने मंगलवार को यह जानकारी दी। 

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डिजाइन पर काम कर रहीं सुरक्षा एजेंसियां
उन्होंने बताया कि सुरक्षा एजेंसियां ड्रोन-रोधी तकनीक के तीन डिजाइनों पर काम कर रही हैं। अंतिम परिणाम तीनों या तीनों का संयोजन (कॉम्बिनेशन) हो सकता है। उन्होंने कहा, ड्रोन के जरिए सीमा पार से हथियारों और मादक पदार्थों की तस्करी का खतरा अगले छह महीनों में खत्म हो जाएगा। तब तक निश्चित रूप से ड्रोन-रोधी तकनीक लगा दी जाएगी। नई प्रौद्योगिकी (टेक्नोलॉजी) पर परीक्षण चल रहे हैं और इसे अंतिम रूप देने के अग्रिम (एडवांस) चरण में हैं।

ड्रोन या यूएवी का इस्तेमाल रोकना बड़ी चुनौती
पंजाब और जम्मू-कश्मीर में ड्रोन या मानव रहित हवाई वाहनों (यूएवी) का इस्तेमाल करके पाकिस्तान से हथियार, गोला-बारूद और नशीले पदार्थों को गिराना कई वर्षों से सुरक्षा एजेंसियों के लिए एक बड़ी समस्या रही है। सरकार ने अगस्त में बताया था कि पंजाब में सीमा पार से हथियारों और नशीले पदार्थों की तस्करी के लिए ड्रोन का इस्तेमाल करने के पिछले तीन वर्षों में 53 मामलों का पता चला था। 
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केंद्र सरकार ने उठाए ये कदम
सरकार ने इस खतरे को रोकने के लिए कई कदम उठाए हैं। जिनमें सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) द्वारा सीमाओं पर चौबीसों घंटे निगरानी, गश्त, नाके लगाना और अंतर्राष्ट्रीय सीमा पर चौकियों की निगरानी शामिल है। पिछले साल मार्च में केंद्रीय गृह राज्य मंत्री निसिथ प्रमाणिक ने कहा था कि गृह मंत्रालय (एमएचए) ने सीमा सुरक्षा बल के महानिदेशक की देखरेख में कमेटी का गठन किया है। इस समिति को विरोधी ड्रोन का मुकाबला करने के लिए उपलब्ध तकनीक का मूल्यांकन करने और उससे निपटने में इसकी प्रभावशीलता को प्रमाणित करने का अधिकार दिया गया है।
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