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DRDO: दुश्मनों की खैर नहीं, क्रूज मिसाइल का परीक्षण अगले महीने, अब समुद्र से वार करने की बढ़ेगी भारत की क्षमता

Fri, 16 Feb 2024 07:06 AM IST
यशोधन शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

एसएलसीएम प्रणाली को भारत में ही दो रूपों में विकसित किया जा रहा है, लैंड अटैक क्रूज मिसाइल और एंटी-शिप क्रूज मिसाइल। इनमें थ्रस्ट वेक्टर कंट्रोल जैसी तकनीक शामिल होगी, जो इसे लक्ष्य की ओर बढ़ने वाले हथियार में बदल सकेगी।
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SLCM Cruise Missile - फोटो : ANI
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विस्तार
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जल्द ही भारत दुश्मनों पर समुद्र से भी वार कर सकेगा। इसके लिए अगले महीने पूर्वी तट पर सबमरीन लॉन्च क्रूज मिसाइल (एसएलसीएम) का परीक्षण हो सकता है। इस क्रूज मिसाइल में 500 किमी दूरी तक वार करने की क्षमता होगी। इस प्रणाली को रक्षा अनुसंधान व विकास संगठन (डीआरडीओ) ने विकसित किया है। भारत में निर्मित सबमरीन के लिए एसएलसीएम एक अहम हथियार साबित हो सकती है। इन सबमरीन को प्रोजेक्ट 75 के तहत बनाया जाना है।
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क्रूज मिसाइलें भविष्य में बनने जा रही रक्षा बलों की रॉकेट आधारित फोर्स में शामिल होंगी। इस फोर्स में छोटी और मध्यम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलें भी शामिल की जाएंगी। इस बीच रक्षा हथियारों में भी नया इजाफा हो सकता है, रक्षा मंत्रालय 800 किमी दूरी तक मारक क्षमता वाली मिसाइलों की खरीद पर इसी हफ्ते बैठक करने जा रहा है। यह मिसाइल जमीन पर वार करने वाली होंगी। मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार इसका फायदा रक्षा बलों की हथियार प्रणाली को मजबूत करने में मिलेगा। एजेंसी

खासियतें: दो प्रकार की एसएलसीएम
एसएलसीएम प्रणाली को भारत में ही दो रूपों में विकसित किया जा रहा है, लैंड अटैक क्रूज मिसाइल और एंटी-शिप क्रूज मिसाइल। इनमें थ्रस्ट वेक्टर कंट्रोल जैसी तकनीक शामिल होगी, जो इसे लक्ष्य की ओर बढ़ने वाले हथियार में बदल सकेगी। उड़ान के दौरान ही इसमें पंख तैनात किए जा सकेंगे, उड़ान के दौरान इंजन शुरू करने की क्षमता भी मिलेगी। तकनीकी परीक्षणों में ये खासियतें साबित की जा चुकी हैं। फरवरी 2023 में भी एसएलसीएम का परीक्षण हुआ था, जिसमें उसने 402 किमी की रेंज हासिल की थी।
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