रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) ने एक ऐसी बुखारी बनाई है, जिससे सालाना 3650 करोड़ रुपये की बचत होगी। ये बुखारी विशेष तौर पर सियाचिन जैसे ठंडे इलाकों के सैनिकों के लिए बनाई गई है। इससे रोजाना 10 लीटर ईंधन की बचत होगी। बुखारी मिट्टी के तेल से चलती है। इसके अलावा यह प्रदूषण घटाने में भी मददगार साबित होगी।
इससे हानिकारक गैसों का उत्सर्जन भी नहीं होगा, जो अभी इस्तेमाल होने वाली बुखारी में होता है। यह नई बुखारी रूम हीटर की तरह काम करेगी। जो सैनिकों को ठंडे इलाकों में राहत देगी। इन ठंडे इलाकों में बिना हीटर के रहना संभव नहीं है।
इस बुखारी को डीआरडीओ के डिफेंस इंस्टीट्यूट ऑफ फिजियोलॉजी एंड अलॉइड साइंसेज (दिपास) के वैज्ञानिकों ने तैयार किया है। सेना के पास इस समय 20 हजार बुखारी हैं। परंपरागत बुखारी की जगह नई बुखारी लगाने से रोजाना 10 करोड़ रुपये यानी सालभर में 3650 करोड़ रुपये की बचत होगी।