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Draupadi Murmu: भाजपा ने राष्ट्रपति चुनाव से सवर्णों की पार्टी की धारणा तोड़ी, मुर्मू को सभी राज्य से मिले वोट

Fri, 22 Jul 2022 07:02 AM IST
योगेश साहू अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली।

सार

अल्पसंख्यक बिरादरी से चार शख्सियतों ने रायसीना हिल्स का सफर किया है। इनमें से तीन जाकिर हुसैन, फखरुद्दीन अली अहमद और एजेपी अब्दुल कलाम मुसलमान थे, तो ज्ञानी जैल सिंह सिख थे। दलित बिरादरी को दो बार प्रथम नागरिक बनने का अवसर मिला है।
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Draupadi Murmu - फोटो : ANI
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विस्तार
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द्रौपदी मुर्मु का देश का पहला आदिवासी राष्ट्रपति बनने का रास्ता तय हो जाने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनके केबिनेट की सहयोगियों ने उनसे मुलाकात की। भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा ने तीन किलोमीटर लंबा रोड शो किया। दरअसल देश को पहला आदिवासी राष्ट्रपति देने का श्रेय लेकर भाजपा बड़ा सियासी लाभ हासिल करने के साथ ही अपने विस्तार का रास्ता भी तय करना चाहती है।

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दरअसल राष्ट्रपति चुनाव के सहारे भाजपा ने हमेशा विस्तार के साथ खुद की अगड़ों की पार्टी की बनी धारणा को तोड़ने का दांव चला है। भाजपा को अब तक तीन राष्ट्रपति बनाने का मौका हाथ लगा है। पार्टी ने इन तीन मौकों पर मुसलमान (एजेपी अब्दुल कलाम), अनुसूचित जाति (रामनाथ कोविंद) और अनुसूचित जनजाति (द्रौपदी मुर्मु) को इस पद के लिए आगे किया।

सबसे ज्यादा ब्राह्मणों को मौका
राष्ट्रपति चुनाव के इतिहास को खंगालें तो अब तक 14 हस्तियां राष्ट्रपति बनी हैं। इस पद पर सबसे अधिक मौका ब्राह्मण बिरादरी को मिला है। इस बिरादरी के अब तक छह तो अगड़ी जाति की आठ शख्सियत इस पद तक पहुंची है।

  • अल्पसंख्यक बिरादरी से चार शख्सियतों ने रायसीना हिल्स का सफर किया है। इनमें से तीन जाकिर हुसैन, फखरुद्दीन अली अहमद और एजेपी अब्दुल कलाम मुसलमान थे, तो ज्ञानी जैल सिंह सिख थे।
  • दलित बिरादरी को दो बार प्रथम नागरिक बनने का अवसर मिला है। इनमें केआर नारायणन और वर्तमान राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद शामिल हैं। मुर्मु के रूप में देश को पहला आदिवासी राष्ट्रपति मिलेगा।
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मुर्मू को सभी राज्यों से मिले वोट, आंध्र प्रदेश, नगालैंड और सिक्किम से विपक्षी उम्मीदवार सिन्हा को नहीं मिला एक भी वोट
राष्ट्रपति चुनाव में आंध्र प्रदेश, नगालैंड और सिक्किम के सभी वोट द्रौपदी मुर्मू को मिले। विपक्ष के उम्मीदवार यशवंत सिन्हा को इन तीनों राज्यों में खाली हाथ रहना पड़ा। आंध्र प्रदेश में 173, नगालैंड में 59 और सिक्किम के सभी 32 विधायकों ने मुर्मू को अपना समर्थन दिया। देश का कोई ऐसा राज्य नहीं रहा, जहां मुर्मू को वोट नहीं मिले हों। हालांकि केरल में कुल 140 विधायकों में मुर्मू को सिर्फ 1 विधायक ने वोट दिया।

सिन्हा को गृह राज्य से सिर्फ 9 वोट
यशवंत सिन्हा को अपने गृह राज्य झारखंड में 81 में से केवल 9 विधायकों के वोट मिले। जबकि द्रौपदी मुर्मू को अपने गृह राज्य ओडिशा में 147 में से 137 विधायकों के वोट मिले।

कोविंद के मुकाबले 25 हजार कम वोट
मुर्मू अपने पूर्ववर्ती राजग उम्मीदवार कोविंद से बड़ी जीत हासिल करने से चूक गईं। विपक्ष के उम्मीदवार यशवंत सिन्हा को भले ही हार गए, मगर उन्हें बीते राष्ट्रपति चुनाव में विपक्ष की उम्मीदवार मीरा कुमार से अधिक वोट मिले।

पिछले चुनाव में राजग प्रत्याशी रामनाथ कोविंद को 65.65% मत मिले, जबकि इस चुनाव में द्रौपदी को एक फीसदी कम 64.03% मत मिले। इसी प्रकार बीते चुनाव में विपक्ष की उम्मीदवार मीरा कुमार को 34.35% मत मिले थे। जबकि इस बार सिन्हा को करीब 36 फीसदी मत मिले।
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यूपी के नतीजे ने किया प्रभावित
बीते चुनाव में उत्तर प्रदेश ने कोविंद की बड़ी जीत में सबसे अहम भूमिका निभाई थी। तब राज्य में राजग के 73 सांसद थे। विधानसभा में राजग को तीन चौथाई बहुमत हासिल था। इस चुनाव में राज्य में राजग के सांसदों की संख्या 73 से घटकर 67 हो गई। इसके अलावा विधानसभा में राजग के पास तीन चौथाई की जगह दो तिहाई से अधिक बहुमत हासिल था। यही कारण है कि मुर्मू कोविंद के मुकाबले 25,241 वोट कम हासिल कर पाई।

तीसरे चरण में ही हो गया हार-जीत का फैसला
  • पहला दौर : सबसे पहले सांसदों के वोटों की गिनती हुई। इसमें 15 सांसदों के मत अवैध घोषित हुए। राजग उम्मीदवार मुर्मु को 540 (378000 मत) तो विपक्ष के उम्मीदवार सिन्हा को महज 208 सांसदों (145600 मत) का समर्थन मिला।
  • दूसरा दौर : 10 राज्यों में 1,138 विधायकों में से मुर्म को 809 विधायकों के मत मिले, जिनका कुल मत मूल्य 1,05,299 था। सिन्हा को महज 329 विधायकों के मत मिले, जिनका मत मूल्य 44,276 था।
  • तीसरा दौर : तीसरे चरण की काउंटिंग खत्म होने पर ही द्रौपदी मुर्मू को 5,77,777 मूल्य के 2,161 वोट मिल गए जो जीत के लिए जरूरी 5,43,261 मूल्य के वोटों से ज्यादा थे।
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