दोहरा हत्याकांड मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट ने कलाकार चिंतन उपाध्याय की उम्रकैद की सजा निलंबित और जमानत देने की याचिका को खारिज कर दिया है। बता दें दिसंबर 2015 में पत्नी हेमा उपाध्याय और उनके वकील हरेश भंबानी की हत्या के मामले में चिंतन उपाध्याय को दोषी करार दिया था। न्यायमूर्ति रेवती मोहिते और न्यायमूर्ति गौरी गोडसे की खंडपीठ ने सोमवार को उपाध्याय की अर्जी खारिज कर दी।
बता दें उपाध्याय ने उन्हें दोषी ठहराने और आजीवन कारावास की सजा सुनाने के सत्र अदालत के आदेश को चुनौती देने के लिए अक्तूबर माह में बॉम्बे हाईकोर्ट का रूख किया था। अपनी अपील में उन्होंने कहा कि ट्रायल कोर्ट द्वारा सुनाए गए फैसले में कई खामियां हैं, जिसमें उन्हें दोषी ठहराने के लिए उचित और ठोस सबूत, तर्क का अभाव दिखाई देता है।
अपील पर सुनवाई लंबित होने तक चिंतन उपाध्याय ने हाईकोर्ट से उनकी सजा को निलंबित करने और उन्हें जमानत पर रिहा करने का आग्रह किया था। डिंडोशी सत्र अदालत के न्यायाधीश एस वाई भोंसले ने पांच अक्तूबर को चिंतन को सट्टेबाजी और अपनी पत्नी की हत्या का दोषी ठहराया। वहीं तीन अन्य आरोपियों को दोषी करार दिया गया था।
क्या है मामला
चिंतन उपाध्याय ने अपनी पत्नी हेमा और उनके वकील हरेश की 11 दिसंबर 2015 को हत्या कर दी थी। वारदात के बाद दोषी उपाध्याय ने गत्ते के बक्सों में शवों को डालकर मुंबई के कांदिवली इलाके स्थित एक खाई में फेंक दिया था।