पाकिस्तान के एक पूर्व राजनयिक ने कहा है कि जिस तरह अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने ऐबटाबाद में ओसामा बिन लादेन को निशाना बनाने के लिए ‘एकतरफावाद’ की राह अपनाई थी, उसी तरह डोनाल्ड ट्रंप को भी यही रास्ता अपनाना होगा, क्योंकि आतंकवाद पर पाकिस्तान का रुख बदलवाने में 33 अरब डॉलर का अमेरिकी वित्त पोषण नाकाम रहा है।
अमेरिका में पाकिस्तान के पूर्व राजदूत हुसैन हक्कानी ने यह भी भविष्यवाणी की है कि जनवरी में सत्ता संभालने को तैयार ट्रंप प्रशासन ‘प्रमुख गैर-नाटो सहयोगी’ के मौजूदा दर्जे से पाकिस्तान को हटाएगा।
अमेरिकी अखबार ‘द वाल स्ट्रीट जर्नल’ में बृहस्पतिवार को अपने ओप-एड में हक्कानी ने लिखा है कि इस्लामाबाद में जनरलों और ढेर सारे नेताओं के लिए पाकिस्तान की भारत के साथ प्रतिस्पर्धा उसके साथ बराबरी करने की योजना का हिस्सा है। इसके लिए अमेरिका के साथ किए वादे तोड़ने और तालिबान से ले कर हक्कानी नेटवर्क तक जिहादी आतंकवाद को समर्थन जारी रखने को उचित ठहराया जाता है।
पाक के पूर्व राजनयिक ने लिखा है कि ओबामा प्रशासन के तहत 21 अरब डॉलर का वित्त पोषण, बुश प्रशासन के तहत पाकिस्तान को मिले 21.4 अरब डॉलर की ही तरह आतंकवादी ठिकानों को बंद करने में नाकाम रहा, लेकिन ओबामा प्रशासन के तहत अमेरिका पाकिस्तान की इजाजत के बगैर ओसामा बिन लादेन को पाक में उसकी पनाहगाह में ठिकाने लगाने में सफल रहा।
ट्रंप प्रशासन को जब भी जरूरत पड़े इसी तरह का एकतरफा रास्ता अपनाना होगा और साथ ही प्रमुख गैर-नाटो सहयोगी के मौजूदा दर्जे से पाकिस्तान का दर्जा आवश्यक रूप से गिराना होगा।