पूर्वी दिल्ली के वेस्ट विनोद नगर में सर्वोदय कन्या विद्यालय ऐसा ही एक मॉडल स्कूल है, जिसमें प्रदेश सरकार ने हैप्पीनेस करिकुलम लागू किया है। शिक्षकों का दावा है कि इस मॉडल से बच्चों की मानसिकता, स्वास्थ्य और शिक्षा के साथ साथ उनके पारिवारिक वातावरण में भी बेहतरीन बदलाव आया है।
स्कूल की वाईस प्रिंसिपल इंदू शर्मा ने अमर उजाला को बताया कि हैपिनेस करिकुलम का प्रभाव देख वे खुद भी हैरान हैं। पहले बच्चे आते थे, प्रार्थना के बाद सीधे पढ़ाई शुरू कर देते थे। कभी पारिवारिक समस्याओं तो कभी ट्रैफिक से उलझती स्कूल पहुंचीं छात्राओं-टीचर्स का व्यवहार प्रभावित रहता था, जिसका असर कक्षा के माहौल और शिक्षा के स्तर पर पड़ता था।
लेकिन अब वे सब आने के बाद आधे घंटे ध्यान करती हैं। खुद को और बच्चों को संयत करती हैं। इसका असर न सिर्फ छात्राओं पर पड़ा है, बल्कि टीचर्स भी घरेलू उलझनों से खुद को दूर कर शिक्षा के लिए एकाग्रचित्त कर पाती हैं।
वे मानती हैं कि इस बदलाव ने उनके स्कूलों का ही नहीं, घरेलू रिश्तों को भी आसान बनाने का काम किया है। यह बड़ा बदलाव है, जिसका असर दिल्ली के संपूर्ण विकास में दिखने वाला है।
बॉयज विंग में हिंदी के अध्यापक संजय कुमार तिवारी ने बताया कि इन स्कूलों में वे एक सामाजिक बदलाव की आहट महसूस कर पा रहे हैं। उनकी कक्षाओं में बच्चे अपेक्षाकृत गरीब वर्ग से हैं। उनके पारिवारिक परिवेश की वजह से उनका व्यवहार कम सुघड़ होता था, उन्हें शिक्षा की तरफ मोड़ने में उन्हें कोशिश करनी पड़ती थी।
लेकिन अब इसी काम को वे ज्यादा सहजता से कर पा रहे हैं। बच्चे अब उनकी बात ज्यादा स्वीकार कर रहे हैं और बच्चों के व्यवहार को सुधारने में भी मदद मिल रही है। यह बड़ा बदलाव पारिवारिक माहौल भी बदल रहा है। उन्होंने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि उनके ये बच्चे कल ज्यादा जिम्मेदार नागरिक बनेंगे और देश में एक नई संस्कृति के वाहक बनेंगे।
इस स्कूल में वह सब कुछ है जिसकी कल्पना किसी महंगी फीस वाले स्कूल में की जा सकती है। स्विमिंग पूल, 350 सीसीटीवी कैमरे से सुरक्षित प्ले ग्राउंड, बड़ा हॉल, स्मार्ट क्लास, कंप्यूटर लैब, बायो-मेट्रिक अटेंडेंस देते कर्मचारी और बच्चों को अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के लिए तैयार करते प्रशिक्षक।