Lok Sabha: कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने विपक्षी सदस्यों से कहा कि सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश ने एससी/एसटी के उप-वर्गीकरण में क्रीमी लेयर को लेकर टिप्पणी की है। यह उनके फैसले का हिस्सा नहीं है। उन्होंने कहा, सदस्यों को समाज को गुमराह करने का प्रयास नहीं करना चाहिए।
कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने शुक्रवार को विपक्ष से कहा कि वह अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति (एससी-एसटी) आरक्षण से बाहर करने के लिए क्रीमी लेयर बनाने पर सर्वोच्च न्यायालय के एक न्यायाधीश की टिप्पणी पर समाज को गुमराह न करे। मेघवाल लोकसभा में प्रश्नकाल के दौरान सवालों का जवाब दे रहे थे। शिवसेना (यूबीटी) के सदस्य भाऊसाहेब वाकचौरे ने एससी-एसटी आरक्षण में क्रीमी लेयर शीर्ष अदालत के फैसले का मुद्दा उठाया था।
विज्ञापन
समाज को गुमराह न करें: अर्जुन राम मेघवाल
मेघवाल ने कहा, सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश ने एससी/एसटी के उप-वर्गीकरण में क्रीमी लेयर को लेकर टिप्पणी की है। यह उनके फैसले का हिस्सा नहीं है। उन्होंने कहा, सदस्यों को समाज को गुमराह करने का प्रयास नहीं करना चाहिए। उन्होंने कहा, संविधान में राज्यसभा या विभिन्न राज्यों की विधानसभाओं में एससी/एसटी आरक्षण के लिए आरक्षण का कोई प्रावधान नहीं है।
कानून मंत्री ने कहा, राज्यसभा में एससी/एसटी को आरक्षण देने का कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है। उन्होंने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 332 के तहत राज्य विधानसभाओं में एससी/एसटी के लिए उनकी आबादी के अनुपात में सीटें आरक्षित हैं।
विज्ञापन
सर्वोच्च न्यायालय ने अपने फैसले में क्या कहा
इस महीने की शुरुआत में मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता में सर्वोच्च न्यायालय के सात न्यायाधीशों की पीठ ने 6:1 के बहुमत का फैसला सुनाया। पीठ ने फैसले में कहा कि राज्य सरकारों को अनुभवजन्य आंकड़ों के आधार पर एससी सूची के भीतर समुदायों को उप-वर्गीकृत करने की अनुमति है।
न्यायाधीश न्यायमूर्ति बीआर गवई ने एक अलग लेकिन इससे मिलते जुलते फैसले में कहा था कि राज्यों को एससी/एसटी के बीच भी क्रीमी लेयर की पहचान करने के लिए एक नीति बनानी चाहिए और उन्हें आरक्षण के लाभ से वंचित करना चाहिए। उन्होंने कहा था कि राज्यों को आरक्षित वर्ग के भीतर आरक्षण देने के लिए एससी/एसटी का उपवर्गीकरण करने का अधिकार है, ताकि वंचित जातियों के लोगों का भी उत्थान हो सके।