भारत के पहले वन स्टॉप क्राइसिस सेंटर (ओएससीसी) के विश्लेषण के अनुसार 8 नवंबर 2016 को नोटबंदी लागू होने के कुछ ही वक्त बाद घरेलू हिंसा के मामले बढ़े हैं। नोटबंदी के बाद पतियों को इस बात की जानकारी मिली की उनकी पत्नियों ने उनकी जानकारी के बिना धन इकट्ठा किया है।
एक्शन एड की क्षेत्रीय निदेशक सारिका सिन्हां के मुताबिक पतियों ने अपनी पत्नियों को डराया, उन्हें मारा जिसकी वजह से उन्हें जेल तक जाना पड़ा। पतियों ने आपा खो दिया था। एक्शन ऐड का एनजीओ "गौरवी" ओएससीसी और मध्यप्रदेश सरकार के जनस्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के साथ मिलकर काम करता है।
सिन्हा के मुताबिक "पत्नियां पिछले काफी वक्त से इस तरह की बचत करती रही थीं, लेकिन ये मामले कभी सामने नहीं आ सके। रातोंरत वो अपने पतियों की नजर में अपराधी बन गईं। सिन्हां ने कुछ पीड़ितों का उदाहरण दिया जिन्होंने जेपी हॉस्पीटल, शिवाजी नगर में ओएससीसी का दरवाजा खटखटाया। टोल फ्री क्राइसिस नंबर पर नवंबर में 1200 कॉल आईं। वहीं हर महीने इन फोन कॉल्स की औसतन संख्या 500 रही। इनमें से 230 महिलाओं की काउंसलिंग की गई।