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नोटबंदी के बाद बढ़ी घरेलू हिंसाः रिपोर्ट

Tue, 07 Feb 2017 05:32 PM IST
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, नई दिल्ली
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भारत के पहले वन स्टॉप क्राइसिस सेंटर (ओएससीसी) के विश्लेषण के अनुसार 8 नवंबर 2016 को नोटबंदी लागू होने के कुछ ही वक्त बाद घरेलू हिंसा के मामले बढ़े हैं। नोटबंदी के बाद पतियों को इस बात की जानकारी मिली की उनकी पत्नियों ने उनकी जानकारी के बिना धन इकट्ठा किया है।
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एक्शन एड की क्षेत्रीय निदेशक सारिका सिन्हां के मुताबिक पतियों ने अपनी पत्नियों को डराया, उन्हें मारा जिसकी वजह से उन्हें जेल तक जाना पड़ा। पतियों ने आपा खो दिया था। एक्शन ऐड का एनजीओ "गौरवी" ओएससीसी और मध्यप्रदेश सरकार के जनस्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के साथ मिलकर काम करता है।

सिन्हा के मुताबिक "पत्नियां पिछले काफी वक्त से इस तरह की बचत करती रही थीं, लेकिन ये मामले कभी सामने नहीं आ सके। रातोंरत वो अपने पतियों की नजर में अपराधी बन गईं। सिन्हां ने कुछ पीड़ितों का उदाहरण दिया जिन्होंने जेपी हॉस्पीटल, शिवाजी नगर में ओएससीसी का दरवाजा खटखटाया। टोल फ्री क्राइसिस नंबर पर नवंबर में 1200 कॉल आईं। वहीं हर महीने इन फोन कॉल्स की औसतन संख्या 500 रही। इनमें से 230 महिलाओं की काउंसलिंग की गई।
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ये मामले हैरान करने वाले हैं

विश्लेषण से खुलासा हुआ है कि जिन महिलाओं की काउंसलिंग की गई उनका 50 प्रतिशत महिलाएं नोटबंदी से संबंधित मामलों की वजह से पतियों के द्वारा यातना की शिकार हुईं। ओएससीसी कॉर्डिनेटर शिवानी सैनी ने 27 साल की पीड़ित महिला के बारे में बताते हुए कहा कि उनके पति ने 9 नवंबर को उसे उसके सात बच्चों के साथ घर से बाहर निकाल दिया। क्योंकि महिला के पास 4500 रुपये थे।

पीड़ित महिला और उसके पति की कांउसलिंग की गई, लेकिन बाद में हालात वैसे ही हो गए। पति उसे फिर प्रताड़ित करने लगा जिसके बाद वो अभी अपने मां-बाप के घर रह रही हैं। सैनी के मुताबिक एक अन्य मामले में एक व्यक्ति अपनी पत्नी से 8 से 10 हजार रुपयों की मांग कर रहा था, जिसे उसकी पत्नी ने इकट्ठा किया था। पति उसे अवैध धन के मामले में जेल भेजने की धमकी देता था।

सैनी कहती हैं कि कई मामलों में पतियों ने पत्नियों द्वारा इकट्ठा की गई रकम पर आपत्ति दर्ज की। साथ ही नए नोटों में बदले गए रुपये भी उन्हें वापस नहीं किए। सैनी ने ये भी कहा कि केंद्र सरकरा ने महिलाओं के बीच में कई जागरुकता अभियान चलाए कि कैसे वो पुराने नोटों को नए नोटों में बदल सकती हैं, और उसके नियम क्या हैं। जिसके बाद शारीरिक उत्पीड़न के मामलों में कमी आई।
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