न्यू जर्सी के एक डॉक्टर मिकैल वर्शास्की ऊर्फ डॉक्टर माइक जिनके यूट्यूब पर पांच मिलियन सब्सक्राइबर है का कहना है कि सोशल मीडिया पर चिकित्सकों की गुणवत्ता में कमी की वजह से सोशल मीडिया पर चमत्कारिक इलाज देने वाले प्रभावशाली लोगों की तादाद बढ़ गई है।
सोशल मीडिया पर कुछ मेडिकल सोशल मीडिया है जिनमें डॉक्टर शामिल नहीं है, क्योंकि ज्यादातर डॉक्टर ये मानते हैं कि गैर प्रोफेशनल तरीके से अपनी बात सोशल मीडिया पर नहीं रख सकते हैं, जिसकी वजह से सोशल मीडिया पर गलत सूचनाएं ज्यादा बढ़ने लगी है।
डॉक्टरों के लिए सोशल मीडिया पर लोकप्रियता मिल जाना जोखिम से कम नहीं है। डॉक्टर की कही बात को उसके दर्शक समझें या वैसे ही लें जैसे डॉक्टर बताना चाहता है, ये थोड़ा मुश्किल हो जाता है। ऑस्टिन को टिकटोक में मिली सफलता के पीछे का कारण उनका मजाकिया ढंग हो सकता है।
दुनिया में ऐसे कई डॉक्टर्स हैं जो अपने मरीजों को ठीक करने या उनका मनोबल बढ़ाने के लिए टिकटोक जैसे प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करते हैं। ऐसा कई बार देखा गया है कि सही सूचना और विचार साथ होने के बावजूद कई डॉक्टर ऐसे माध्यमों में खुद को फंसा हुआ महसूस करते हैं।
जैफरी वैनविंगेन एक निजी क्लीनिक चलाते हैं। लोगों की मदद करने के लिए उन्होंने ऑनलाइन वीडियो बनाने की सोची। डॉ जैफरी ने कोविड-19 काल में सामान कैसे खरीदा जाए इस पर एक वीडियो बनाया। वीडियो जारी करने के पीछ कारण यह था कि लोगों में जागरुकता फैलाई जा सके कि किराने की दुकान से भी कोरोना हो सकता है।
डॉ जैफरी ने अपनी 13 मिनट की वीडियो में लोगों को जानकारी दी कि खाने के सामान को कैसे कीटाणुनाशक बनाना है और कैसे खाने के डब्बों को फेंकना है। ये वीडियो धड़ल्ले से सोशल मीडिया पर फैली और लोगों के बीच कोरोना वायरस को लेकर चिंता और बढ़ गई।
इस वीडियो को 25 मिलियन से ज्यादा लोगों ने देखा लेकिन वीडियो में कुछ गलत जानकारी भी थी। वीडियो की शुरुआत में डॉ ने कहा कि फल और सब्जियों को साबून से ना धोएं, ऐसा करने से पाचन प्रक्रिया में दिक्कत हो सकती है।
डॉ जैफरी पर आरोप लगा कि सब्जियों और फलों की प्रक्रिया पर कोई गाइडलाइन नहीं है तो वो इस वीडियो पर सफाई दें। डॉ जैफरी ने उस हिस्से को एडिट करने की पेशकश सामने रखी और पूरी वीडियो जारी रखने का फैसला किया।
डॉ जैफरी ने कहा कि उनसे नादानी में गलती हुई है, जिसके खतरनाक परिणान नहीं होंगे। उन्होंने कहा कि वो ऐसे कई डॉक्टर को जानते हैं जो हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन जैसी दवाई को प्रमोट कर रहे हैं।
डॉक्टर माइक का कहना है कि अगर आप लोकप्रिय डॉक्टर हैं तो लोग आपकी गाइडेंस का इंतजार करते हैं और आप बिना किसी शोध वाली जानकारी पर विश्वास रखते हैं कि यह जानकारी सीडीसी और विश्व स्वास्थ्य संगठन की गाइडेंस की पुष्टि करती है तो यह गलत हो जाता है।
मौजूदा समय में यह बड़ी समस्या है कि लोग किसी भी परेशानी का हल इंटरनेट पर ढूढ़ते हैं। सीडीसी कोरोना वायरस पर किए गए शोधों पर वीडियो जारी करता है जिसमें कई बार ये दावा किया गया है कि डॉक्टर नहीं चाहते कि आम लोगों को यह पता चले।
इसके अलावा अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के बयान भी लोगों के भीतर डर फैलाने का काम करते हैं। डोनाल्ड ट्रंप के विचारों से रोचक खबरें बनाने में फायदा मिलता है लेकिन सार्वजनिक मंच पर यह खतरनाक है।
ऑनलाइन लोकप्रियता लोगों को ब्रांड बना देती है। डॉ चियांग का कहना है कि खुद को ब्रांड बनाना कुछ लोगों को अलग दिशा में ले जाता है। डॉक्टर माइक दूसरे लोगों की तरह अपने इंस्टाग्राम और यूट्यूब चैनल पर स्पॉन्सर लेते हैं लेकिन ये स्पॉन्सरशिप मेडिकल सामानों की नहीं होती है।
डॉ चियांग अपने अस्पताल में सोशल मीडिया के चीफ मेडिकल अफसर के तौर पर भी काम करते हैं। चियांग इस बात का ध्यान रखते हैं कि उनकी टिकटोक वीडियो में किसी तरह की कोई अभद्र बातें ना कही गई हो।
चियांग का कहना है कि मेडिकल की पढ़ाई करते समय यह नहीं सिखाया जाता है कि सार्वजनिक प्लेटफॉर्म पर कैसे बात करनी है और अपने समुदाय के लोगों के साथ सोशल मीडिया पर कैसे संवाद करना है।
सोशल मीडिया पर काम करना आसान नहीं है। चियांग ने कहा कि कुछ कंपनियां सोशल मीडिया से मेडिकल प्रोफेशनल के विचार चुराकर उन्हें अपने प्रोडक्ट बेचने के लिए इस्तेमाल करती हैं। हालांकि डॉ चियांग औक डॉ माइक दोनों का कहना है कि डॉक्टरों का ऑनलाइन आना जोखिम से भरा है लेकिन ऐसा करने से लोगों को अपने स्वास्थ्य के लिए उचित सूचनाएं मिल जाती हैं।