केरल की स्वास्थ्य मंत्री वीना जॉर्ज।
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केरल के कोल्लम जिले में बुधवार को एक युवा महिला डॉक्टर की जघन्य हत्या को लेकर विपक्षी दलों और चिकित्सा पेशेवरों के हमले के बाद केरल सरकार ने शुक्रवार को मामले को शांत करने के लिए एक घोषणा की। सरकार ने डॉक्टरों की लंबित मांगों को पूरा करने के लिए एक समिति की स्थापना सहित उनकी चिंताओं को दूर करने के लिए अन्य उपायों की घोषणा की।
बता दें कि कोट्टायम जिले के कडुथुरुथी इलाके की मूल निवासी और अपने माता-पिता की इकलौती संतान डॉ. वंदना दास की कोल्लम जिले के एक तालुक अस्पताल में इलाज करने के दौरान हत्या कर दी गई थी। अस्पताल में इलाज के लिए लाए गए एक व्यक्ति ने बुधवार को उसके घाव की मरहम-पट्टी करते वक्त कैंची और सर्जरी में इस्तेमाल होने वाले ब्लेड से हमला कर वंदना दास की हत्या कर दी थी।
जिसके बाद राज्य भर के विभिन्न अस्पतालों में स्वास्थ्य पेशेवरों, मेडिकल इंटर्न, छात्रों और हाउस सर्जनों ने सड़कों पर विरोध-प्रदर्शन शुरू कर दिया था। हत्या के विरोध में चिकित्सकों की हड़ताल लगातार दो दिनों तक जारी रही। हड़ताल कर रहे डॉक्टरों ने राज्य सरकार से अस्पतालों की सुरक्षा के लिए तत्काल प्रभाव से नया कानून लाए जाने की मांग की थी।
एक महीने के भीतर रिपोर्ट देगी समिति
स्वास्थ्य मंत्री वीना जॉर्ज ने कहा कि प्रस्तावित समिति चिकित्सा शिक्षा सचिव की अध्यक्षता में स्नातकोत्तर छात्रों और हाउस सर्जनों द्वारा उठाए गए विभिन्न मुद्दों का अध्ययन करेगी और एक महीने के भीतर एक रिपोर्ट पेश करेगी। उन्होंने कहा कि एक मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) जल्द ही उन लोगों के लिए जारी की जाएगी जो अपने मेडिकल रेजिडेंसी प्रोग्राम के तहत दूसरे अस्पतालों में काम करने जाते हैं। मृतक डॉ दास अजीजिया मेडिकल कॉलेज अस्पताल में हाउस सर्जन के रूप में कार्यरत थीं, लेकिन अपने प्रशिक्षण के तहत कोट्टारक्करा तालुक अस्पताल में काम कर रही थीं।
इससे पहले गुरुवार को प्रदेश सरकार ने कहा था कि वह राज्य में स्वास्थ्य कर्मियों एवं अस्पतालों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कानून में संशोधन के लिए एक अध्यादेश जारी करेगी। मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से जारी बयान में कहा गया कि स्वास्थ्य कर्मियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए केरल स्वास्थ्य देखभाल सेवा (हिंसा और संपत्ति को नुकसान की रोकथाम) अधिनियम 2012 में संशोधन के लिए एक अध्यादेश कैबिनेट की अगली बैठक में पेश किया जाएगा। बयान में कहा गया है कि अध्यादेश जारी करने के अलावा राज्य के प्रमुख अस्पतालों में पुलिस चौकी भी स्थापित की जाएगी।
इससे पहले केरल उच्च न्यायालय ने मरीज द्वारा चाकू गोद कर डॉक्टर की हत्या को ‘व्यवस्थागत नाकामी’ का नतीजा करार दिया था और कहा था कि इसे इक्का-दुक्का मामले की तरह नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। प्रदेश सरकार का यह फैसला उच्च न्यायालय के इस टिप्पणी के बाद आया।