सुप्रीम कोर्ट में डॉक्टर आरुषि जैन ने केंद्र सरकार के उस फैसले पर सवाल उठाया है जिसमें कोरोना महामारी से निपट रहे डॉक्टरों के 14 दिन के क्वारंटीन की अनिवार्यता को समाप्त किया गया है। कोर्ट ने जैन द्वारा दाखिल हलफनामे पर केंद्र सरकार से जवाब दाखिल करने को कहा है।
जस्टिस अशोक भूषण, जस्टिस एसके कौल और जस्टिस एमआर शाह की पीठ ने जैन के हलफनामे को रिकॉर्ड पर लिया और सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से कहा कि वह इस पर अगले हफ्ते जवाब दाखिल करें। डॉक्टर ने अपने वकील के जरिए हलफनामा दाखिल कर कहा कि केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने 15 मई को कोविड और गैर कोविड इलाके में काम करने वाले मेडिकल स्टाफ के मैनेजमेंट के लिए एडवाइजरी जारी की है।
इसमें कहा गया है कि कोविड के इलाज में तैनात मेडिकल स्टाफ के लिए 14 दिन के क्वारंटीन की अनिवार्यता खत्म कर दी गई है। केंद्र के बाद कर्नाटक सरकार ने भी 16 मई को सर्कुलर जारी कर कहा कि जिन मेडिकल कर्मियों को पूरे पीपीई किट दी जा रही है और कोरोना के लक्षण नहीं हैं, उन्हें अलग रखने की जरूरत नहीं है।
15 मई को सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से कहा था कि वह बताए कि डॉक्टरों को अस्पताल के नजदीक रहने की व्यवस्था हो सकती है। डॉक्टरों के रहने के बारे में एक एसओपी की जरूरत है। कोर्ट ने कहा था कि हम अगले हफ्ते सुनवाई करेंगे तब तक सॉलिसिटर जनरल अस्पताल के नजदीक डॉक्टरों के लिए रहने व क्वारंटीन की सुविधाएं देने के बारे में सरकार से निर्देश लेकर आएं।