पिछले कुछ दिनों से अतंरराष्ट्रीय बाजार में डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये में लगातार कमी देखने को मिल रही है। एक डॉलर की तुलना में भारतीय रुपये की कीमत 72 रुपये तक पहुंच गई है। मगर क्या आपको पता है कि रुपये पर छपी गांधीजी की तस्वीर कोई पेंटिंग नहीं बल्कि उनकी असल तस्वीर है। आज हम आपको भारतीय मुद्रा से संबंधित ऐसी ही जानकारियां बताते हैं।
- भारत के
केंद्रीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के पास एक रुपये के नोट को छोड़कर सभी मूल्यों के नोट छापने का अधिकार है। रिजर्व बैंक को यह अधिकार आरबीआई अधिनियम, 1934 के तहत दिया गया है। हालांकि इस अधिनियम की धारा 24(1) के तहत इसके पास एक रुपये का नोट छापने का अधिकार नहीं है।
- 1940 के मुद्रा अध्यादेश के अनुसार एक रुपये का नोट भारत सरकार जबकि 2 से लेकर 2000 रुपए तक के नोट रिजर्व बैंक द्वारा छापे जाते हैं। वहीं आरबीआई के पास 10 हजार रुपए तक का नोट छापने का अधिकार है। एक रुपये के नोट की छपाई वित्त मंत्रालय करता है। इसी वजह से उसपर आरबीआई के गवर्नर की बजाए वित्त सचिव के हस्ताक्षर होते हैं।
- भारत के आजाद होने के दो साल बाद भी राजा जॉर्ज पंचम की तस्वीर वाली मुद्रा का भारत में चलन था। उस समय 16 आनो में गणना हुआ करती थी। लेकिन साल 1957 के बाद देश में दशमलव प्रणाली को अपनाया गया और 100 पैसा एक रुपए में बदल गया। 1949 में इसमें राजा की तस्वीर की बजाए
अशोक स्तंभ को छापा गया।
- इसी तस्वीर से बाद में राष्ट्रपिता महात्मा गांधीजी के चेहरे को पोट्रेट के रूप में भारतीय नोटों पर अंकित किया गया जो अब भारतीय मुद्रा की विशिष्टता बन गया है।