दक्षिण अफ्रीकी देश सूडान की मरूस्थलीय परिस्थितियों में भारतीय ग्वार की फसल उगाने की तैयारी हो रही है और इसके लिये भारत के एक प्रमुख कृषि वैज्ञानिक की मदद ली जा रही है।जोधपुर स्थित केंद्रीय शुष्क क्षेत्र अनुसंधान संस्थान (काजरी) के पूर्व दलहन वैज्ञानिक की तकनीकी सलाह से उत्तरी सूडान के किसानों को ग्वार की उन्नत जैविक आधारित खेती करने में मदद मिलेगी।
ग्वार की उन्नत खेती के लिये तकनीकी सलाह देकर सूडान के खार्तूम से लौटे काजरी के वैज्ञानिक डॉ.डी कुमार ने 'भाषा' को बताया कि सूडान में भी राजस्थान की जैसी मरुस्थलीय परिस्थितियां हैं। कम बारिश में किसानों को तकनीकी जानकारी के जरिये गुणवत्ता पूर्ण, जैविक खाद के जरिये ग्वार की फसल का अधिक उत्पादन करने के लिये वहां की एक प्रमुख कम्पनी ने उनकी मदद मांगी थी। इसी सिलसिले में पिछले माह वे चार अगस्त से 22 अगस्त तक सूडान गये थे।
उन्होंने बताया कि राजस्थान के मरूस्थलीय इलाकों की तरह सूडान में भी प्रतिवर्ष 150 से 400 मिलीमीटर तक बारिश होती है। कम बारिश और 80 प्रतिशत तक आर्द्रता के कारण ग्वार की फसल में 'परण जीवाणु अंगमारी' जैसी बीमारी के चलते पत्तियां झुलस जाती हैं, जिससे फसल नष्ट हो जाती है। उन्होंने बताया कि गुणवत्ता पूर्ण ग्वार उत्पादन के लिये भूमि का चुनाव, भूमि की तैयारी, बीज की किस्म, बोने का तरीका, निराई गुड़ाई और संरक्षण और निर्धारित समय पर फसल की कटाई, भंडारण आवश्यक है और वे इन सभी गतिविधियां पर निगरानी रखेंगे।
डॉ कुमार ने बताया कि वह वहां 100 प्रतिशत जैविक उत्पादन के लिए प्रयासरत हैं और इस दिशा में जरूरी उपाय किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि सूडान की राजधानी खार्तूम से 650 किलोमीटर की दूरी पर कुर्देफान की राजधानी बोयड के पास स्थित एक कस्बे अलकोई में ग्वार की खेती का काम शुरू कर दिया गया है।
उन्होंने बताया कि अलकोई में 15 अगस्त से 20 अगस्त के बीच करीब तीन सौ पचास एकड़ जमीन पर ग्वार की बुवाई कर दी गई है। बुवाई के लिये ऐसी भूमि का चयन किया गया है जहां बारिश आधारित खेती होगी और किसी प्रकार की सिंचाई नहीं होगी। अलकोई के पास स्थित अपासाइन में भी 400 एकड़ भूमि में भी ग्वार की बुवाई कर दी गई है।
उन्होंने बताया कि ग्वार की दो उन्नत श्रेणी के बीज भारत से सूडान भेजे गये हैं और जिन स्थानों पर बुआई की गई है वहां के हालात का जायजा लेने के लिये वह फिर से सूडान जायेंगे। उन्होंने बताया कि ग्वार गम को 70 उद्योगों में प्रयोग में लाया जाता है। खाद्य पदार्थो, मीट, आइसक्रीम, सौंन्दर्यवर्धक पदार्थो, तेल शैंपू, क्रीम में इसका प्रयोग किया जाता है।
(इनपुट: भाषा)