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Maharashtra: 'लहंगा नहीं, सलवार कमीज पहनें', सिख धार्मिक निकाय ने दुल्हनों के लिए की ड्रेस कोड की सिफारिश

Mon, 18 Dec 2023 07:20 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई

सार

Maharashtra: तख्त के जत्थेदार कुलवंत सिंह और उनके सहयोगियों ने शुक्रवार को 'गुरमत' (एडवायजरी) की घोषणा की। नांदेड़ के स्थानीय गुरुद्वारों द्वारा इस गुरमत को अपनाए जाने की उम्मीद है।
 
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श्री हजूर साहिब - फोटो : फाइल फोटो
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विस्तार
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हजूर साहिब की ओर से हाल ही में जारी एक एडवायजरी में 'आनंद कारज' (सिख विवाह समारोह) में भाग लेने वाली दुल्हनों के लिए एक नए ड्रेस कोड की रूपरेखा तैयार की गई है। एडवायजरी में कहा गया है कि दुल्हनें भारी लहंगे के बजाय 'सलवार-कमीज और चुन्नी' का चयन करें। इसके अलावा, सिख परंपराओं का पालन करते हुए दूल्हा और दुल्हन के लिए शादी के कार्ड में नाम के पीछे 'सिंह' और 'कौर' जोड़ने का भी सुझाव दिया गया है। महाराष्ट्र के नांदेड़ में हजूर साहिब सिख धर्म के आध्यात्मिक और लौकिक केंद्र के रूप में मान्यता प्राप्त पांच 'तख्तों' में से एक है। 

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तख्त के जत्थेदार कुलवंत सिंह और उनके सहयोगियों ने शुक्रवार को 'गुरमत' (एडवायजरी) की घोषणा की। नांदेड़ के स्थानीय गुरुद्वारों द्वारा इस गुरमत को अपनाए जाने की उम्मीद है। एडवायजरी में कहा गया है कि पारंपरिक सलवार-कमीज को प्राथमिकता देने की जड़ें इस बात पर आधारित हैं कि बड़े आकार के लहंगे दुल्हनों को समारोह के दौरान ठीक से बैठने, खड़े होने और पूजा करने में बाधा बनते हैं।

शादियों में अनावश्यक खर्ज कम करने की सलाह
एडवायजरी में समारोह की पवित्रता बनाए रखने के लिए शादियों में अनावश्यक खर्च को कम करने पर भी जोर दिया गया है। नांदेड़ के हजूर साहिब के प्रशासक विजय सतबीर सिंह ने कहा, 'गुरमत नांदेड़ में स्थानीय गुरुद्वारों के लिए आचार संहिता के रूप में काम करता है। इसके अलावा, गुरमत को अमृतसर में अकाल तख्त सहित शेष चार तख्तों द्वारा अपनाए जाने की संभावना है।

गंतव्य शादियों में गुरु ग्रंथ साहिब ले जाने के खिलाफ आदेश
अकाल तख्त ने अक्टूबर में गुरुद्वारों के बाहर गंतव्य (अपनी पसंद की जगहों पर) शादियों में गुरु ग्रंथ साहिब को ले जाने के खिलाफ एक हुकुमनामा (आदेश) जारी किया था। आदेश में गुरुद्वारों के भीतर पारंपरिक सिख समारोह आयोजित करने पर जोर दिया गया है, जहां दंपति गुरु ग्रंथ साहिब की परिक्रमा करते हुए अपनी प्रतिज्ञा लेते हैं। 
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शादी कार्ड पर 'सिंह' और 'कौर' को शामिल करने पर जोर
नांदेड़ में 'तख्त सचखंड श्री हजूर अचलनगर साहिब' के हालिया गुरमत में शादी के कार्ड पर 'सिंह' और 'कौर' को शामिल करने पर जोर दिया गया है और उन्हें सिख शिक्षाओं के अनुसार प्रत्यय के रूप में शामिल करने की वकालत की गई है। इसके अलावा, गुरमत में शादी समारोह के लिए गुरुद्वारे में प्रवेश के दौरान दुल्हन के सिर पर फूलों से बने 'छत्र' या रिश्तेदारों द्वारा ले जाए जाने वाले दुपट्टे के इस्तेमाल पर भी आपत्ति जताई गई। इस आपत्ति के पीछे तर्क यह है कि एक 'छत्र' के तहत कोई और अंदर नहीं जा सकता है क्योंकि गुरुद्वारा एक ऐसा स्थान है जहां पवित्र ग्रंथ सर्वोच्च महत्व रखता है।
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