सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को डीएमआरसी-डीएएमईपीएल विवाद मामले में सुनवाई के दौरान टिप्पणी करते हुए कहा कि एक सप्ताह और इंतजार करेंगे और उसके बाद कानून अपना काम करेगा। विवाद के तहत रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर की सब्सिडयरी कंपनी दिल्ली एयरपोर्ट मेट्रो एक्सप्रेस प्राइवेट लिमिटेड और एक्सिस बैंक ने डीएमआरसी से 2500 करोड़ रुपये का रिफंड मांगा है।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा- एक सप्ताह और इंतजार करेंगे
वरिष्ठ वकील अभिषेक सिंघवी, जो एक्सिस बैंक की तरफ से पेश हुए, ने जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस एन कोटिश्वर सिंह की पीठ को बताया कि दोनों पक्षों में समझौते के लिए बातचीत चल रही है। सिंघवी ने कहा कि अटॉर्नी जनरल आर वेंकटरमानी मध्यस्थता कर सकते हैं। इससे विवाद को तेजी से निपटाने में मदद मिलेगी। इस पर पीठ ने कहा कि 'हम एक सप्ताह और इंतजार करेंगे, अगर दोनों पक्ष विवाद पर समझौता कर लेते हैं तो अच्छा होगा वरना कानून अपना काम करेगा।' पीठ ने मामले की सुनवाई 14 मई तक के लिए स्थगित कर दी।
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क्या है विवाद
यह विवाद दिल्ली में एयरपोर्ट एक्सप्रेस मेट्रो लाइन के संचालन से संबंधित है। दिल्ली एयरपोर्ट मेट्रो एक्सप्रेस लिमिटेड के कंसोर्टियम डी.ए.एम.ई.पी.एल. और डीएमआरसी के बीच एयरपोर्ट लाइन के निर्माण, संचालन और रखरखाव के लिए साल 2008 में एक समझौता किया था। इस समझौते में नई दिल्ली रेलवे स्टेशन और इंदिरा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे तथा दिल्ली के अन्य स्थानों के बीच मेट्रो रेल संपर्क प्रदान करने के लिए एक सार्वजनिक-निजी क्षेत्र की भागीदारी हुई। डी.ए.एम.ई.पी.एल. को एक वाणिज्यिक उद्यम के रूप में परियोजना का प्रबंधन करने का अधिकार दिया गया था।
समझौते में डी.एम.आर.सी. को भूमि अधिग्रहण और नागरिक संरचनाओं के बारे में मंजूरी और लागतों की जिम्मेदारी दी गई थी, जबकि डी.ए.एम.ई.पी.एल. को रेलवे प्रणालियों के डिजाइन, आपूर्ति, स्थापना, परीक्षण और कमीशनिंग जैसे अन्य कार्य करने थे। डी.एम.आर.सी. द्वारा स्टेशनों तक पहुंच प्रदान करने में देरी और खराब निर्माण के चलते डी.ए.एम.ई.पी.एल. ने 2012 में समझौते को स्थगित करने की मांग की थी। जुलाई, 2012 में DAMEPL ने परिचालन बंद कर दिया और उसके बाद अक्टूबर, 2012 में मध्यस्थता की कार्यवाही शुरू की गई।