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डीएमके का दावा: डाक मतपत्रों में हुई गड़बड़ी, मद्रास हाईकोर्ट ने विधायक को वोट डालने से रोका

Tue, 12 May 2026 05:03 PM IST
Asmita Tripathi पीटीआई, चेन्नई

सार

तमिलनाडु विधानसभा में बुधवार को मुख्यमंत्री विजय विश्वास पेश करेंगे। इसी बीच मंगलवार को  डीएमके नेबड़ा दावा किया। पार्टी कहना है कि डाक वोटों में कथित गड़बड़ी के मामले  मद्रास हाईकोर्ट ने टीवीके के एक विधायक को वोट डालने से रोक लगा दिया है। 
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एमके स्टालिन - फोटो : ANI
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विस्तार
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तमिलनाडु में सियासी हलचल के बीच डीएमके ने मंगलवार को बड़ा दावा किया। पार्टी ने कहा कि डाक वोटों में कथित गड़बड़ी के मामले को देखते हुए मद्रास हाईकोर्ट ने टीवीके के एक विधायक को विधानसभा में होने वाले फ्लोर टेस्ट में वोट डालने से रोक दिया है। 

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डीएमके को मिला ज्यादा वोट

पार्टी के प्रवक्ता सरवनन अन्नादुरई ने पीटीआई वीडियो को बताया कि अगर विवादित वोट डीएमके के पक्ष में गिना जाता है, तो मतगणना बराबर हो जाएगी, जिसके बाद चुनाव का फैसला करने के लिए सिक्का उछालना पड़ेगा।  टीवीके के सीनिवासा सेतुपति आर को चुनाव में 83,373 वोट मिले, जबकि डीएमके के केआर पेरियाकरुप्पन को भी 83,374 वोट मिले। सेतुपति को सिर्फ एक वोट के अंतर से विजेता घोषित किया गया।

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मतदान ना देने का दावा
अन्नादुराई ने आगे कहा कि अदालत ने विधायक को निर्देश दिया है कि जब तक याचिका पर फैसला नहीं आ जाता, तब तक वे मतदान से परहेज करें। उदयनिधि स्टालिन द्वारा सनातन धर्म पर की गई टिप्पणियों को लेकर भाजपा के हमलों का जवाब देते हुए अन्नादुराई ने डीएमके की वैचारिक स्थिति को स्पष्ट किया। प्रवक्ता ने कहा, 'तमिलनाडु में, सनातन धर्म को उस जातिगत पदानुक्रम के बराबर माना जाता है जिसे यह कायम रखता है।'
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नीट रद्द पर क्या कहा?
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि जातिगत उत्पीड़न और हिंदू धर्म के भीतर मौजूद कठोर संरचनाओं के खिलाफ लड़ना डीएमके का डीएनए है। प्रवक्ता ने पेपर लीक की खबरों के बाद नीट परीक्षा को रद्द करने की डीएमके की मांग को भी दोहराया। उन्होंने संकट से निपटने के केंद्र सरकार के तरीके की आलोचना करते हुए इसे तुगलक दरबार करार दिया।


अन्नादुराई ने बताया कि सीबीआई की जांच या डेटा लीक के आरोपों ने परीक्षा को चौथी या पांचवीं बार प्रभावित किया है। उन्होंने उन छात्रों की दयनीय स्थिति पर प्रकाश डाला, जिन्होंने अपनी प्लस टू की शिक्षा की कीमत पर नीट प्रारूप पर ध्यान केंद्रित किया। उन्होंने आगे कहा, 'परीक्षा रद्द होने के बाद, छात्रों के सामने पुनर्परीक्षा या प्लस टू के अंकों पर वापस लौटने के बीच कठिन विकल्प है। दोनों ही स्थितियां अत्यधिक तनाव का कारण बनती हैं।'





 

 

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